छ. ग. राज्य वन विकास निगम बारनवापारा के कोडार काष्ठागार डिपों में करोड़ो का घपला ग्रेडर ने किया खुलासा
रायपुर / छ. ग. राज्य वन विकास निगम के अधिनस्थ बारनवापारा परियोजना मंडल के कोडार काष्ठागार डिपों में विगत कई वर्षों से लकड़ी का हेराफेरी चल रहा है! लेकिन प्रबंध संचालक को कानों कान खबर नही है, जब से कोडार काष्ठागार डिपों खुला है तब से एक एक रिकार्ड का जांच किया जायेगा तो सारे मामला का खुलासा हो जायेगा!
वन विकास निगम के कोडार काष्ठागार डिपों में कार्यरत ग्रेडर का लिखा हुआ लेटर प्राप्त हुआ जिसमें सारे विवरण से मंडल प्रबंधक को अवगत कराया है! मामला यह है कि कोडार काष्ठागार डिपों का है ग्रेडर ने लिखित रूप से बताया है कि सितंबर 2021 की स्थिति में आमद, निर्वतन, और अंतर की जानकारी निम्नानुसार है!

निलाम में प्रस्तावित में आमद से ज्यादा नीलाम में रखा गया जिसमें 2431 नग 436.459 घ. मी. काष्ठ ज्यादा हुआ है, काष्ठ की मात्रा बढ़ा हुआ है, उक्त काष्ठ कहां से आया है, और कैसे प्राप्त हुआ है संसय और जांच का विषय है!
कोडार काष्ठागार डिपो का बड़ा कारनामा सामने आया है, चालान क्रमांक 8382/04 दिनांक 01.09.2021 को POR मटेरियल चालान द्वारा डिपों में प्राप्त किया गया है, जिसका डिपों नंबर 78867 से 78874= 08 नग की डिपों एलाट हुआ है लेकिन नीलाम में इस डिपों नं. की लट्ठा ही नही है!


मई 2021 से सितंबर तक के आमद में चालान में बल्ली को काष्ठ बनाया गया है, लेकिन नीलाम में डिपो नं. की काष्ठ नीलाम में नही है प्रत्येक चालान में 10 से 15 नग बल्ली को लट्टा बनाया है जो कि संभव नही है!
अनुज्ञा पत्र में भी लट्टा बल्ली बेचते है उसे रास्ता में कुछ मत हो करके अनुज्ञा पत्र में जितना नग बेचता है उसे किसी भी लाट में लिखकर नग बढ़ाकर घ. मी. को ज्यों का त्यों रखकर जारी कर दिया जाता है!
मनी रसीद में भी वाहन चालक से नियमानुसार वसुली किया जाता है लेकिन मनी रसीद में राशि बंचाकर कम राशि लिख दिया जाता है!
ग्रेडर ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की सारी पोल खोलकर रख दिये है, न जाने जब से डिपों खुला है तब से कितना हजारों करोड़ो रूपया का सेंध लगा दिया होगा!
जिस प्रकार से खुलासा हो रहा है उससे येसा प्रतित होता है कि आंखों के सामने ट्रको ट्रक काष्ठ निकल गया होगा और प्रबंध संचालक को इसकी भनक तक नही लगी होगी! कोडार काष्ठागार डिपों जब से खुला है तब से कौन टीपी काटता था किसकी राईटींग है कौन गोस्वारा बनाता था इसकी सुक्ष्म रूप से जांच क्या जाये!
इतना भारी तादात में काष्ठ का आमद होना और बिक्री भी हो जाना चिंता का विषय है, ग्रेडर ने ये भी लेख किया है कि रात्री गस्त के समय POR मटेरीयल सागौन चिरान तथा 01 नग सायकल को चालान क्र. 8070/21 दिनांक 14.01.2022 के द्वारा काष्ठागार डिपों में भेजा गया था जबकी मटेरीयल सागौन चिरान को नीलाम दिनांक 08.01.2022 को नीलाम में प्रस्तावित कर दिया जिसका लाट क्र. 2075 स्टेक 5640 में 16 नग = 0.077 घ. मी. है! जो कि संभव ही नही है जिसे डिपो प्रभारी किया गया है !
उक्त मामले को कफन दफन करने के लिये पुरा वन विकास निगम के अधिकारी कमर कस चुके थे लेकिन आखिर कार उजागर हो ही गया! 2431 नग = 436.459 घ. मी. सागौन के लट्ठा पचा गया! छत्तीसगढ़ वन विकास निगम लिमिटेड में अधिकारी कर्मचारी की पाचन क्षता बहुत अधिक है ,अच्छी है जो लकड़ी जैसे चीजों को पचा दे रहे है जब एक वर्ष में इतना सारा गंभीर मामला सामने आया है तो लगभग वर्ष 1998 से खुला है डिपों न जाने कितना माल पचा गया होगा!
ग्रेडर की ईमानदारी ने वन विकास निगम को नंगा करके रख दिया है, करोड़ो रूपया के सागौन काष्ठ को पचा गया है! सीधे तौर पर इसे चोरी ही कह सकते है, जो 2431 नग लट्टा को डिपों से रातो रात पार्सल कर दिया,,,, क्या इसकी भरपाई प्रबंध संचालक करेंगें, या बारनवापारा के ईमानदार मंडल प्रबंधक करेंगें या फिर डिपों के ईमानदार कर्मचारी करेंगें!
यह तो अभी केवल ट्रेलर है, पुरा के पुरा फिच्चर बाकी है!

