धरमजयगढ़ वन मंडल में उपाध्याय डीएफओ के आने के बाद कार्यवाही नगन्य, अपराधियों को बचाने के उद्देश्य से संरक्षण दिया जा रहा है
रायपुर / छत्तीसगढ़ के एक येसा गढ़ जिसे धरमजयगढ़ के नाम से जाना जाता है, यहां पर लंबे समय से भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, धरमजयगढ़ वन मंडल में जो भी डीएफओ आते है भ्रष्टाचार के जाल से उबर नही पाते हैं।

धरमजयगढ़ वन मंडल में काष्ठागार डिपों बड़ा गजब का खेला हुआ है, डिपों से एक कर्मचारी सत कुमार चौहान नामक वन रक्षक ने 06 नग सागौन का लट्ठा खरिदा, वह 06 नग लट्ठा खरसिया के लिये परिवहन हुआ, डिपों बैरियर में 06 नग 0.344 घ.मी. इन्द्राज हुआ लेकिन यही 06 नग लट्ठा जब छाल वन परिक्षेत्र के अंतर्गत वनोपज जांच नाका एडू में बैरियर में पहुंचता है तो वहां पर 08 नग 0.944 घ.मी.इन्द्राज होता है। उसके बाद जैसे ही खरसिया वन परिक्षेत्र के भालूनारा बैरियर पहुंचता है वाहन तो उस बैरियर में भी 08नग 0.944 घ.मी.इन्द्राज होता है।

बड़ा गजब का खेला है, उक्त मामले को यहां पर गंभीरता पूर्वक लेने की बात है, प्राप्त जानकारी के अनुसार से काष्टागार डिपों धरमजयगढ़ में पुरूषोत्तम ठेठवार के द्वारा टीपी काटा गया है। भले ही हस्ताक्षर डिपों प्रभारी रेंजर के द्वारा किया गया है, लेकिन खेल टीपी से ही हुआ है, संदेह जताया जा रहा है कि कहीं टीपी चार पर्तों में तो नही बनाया गया होगा? कही वैसे ही प्रिंट करके उक्त टीपी को चार पर्तों में करके जो ओरिजनल टीपी होगा उसमें 06 नग और चौथा पर्त में 08 नग का खेल खेला होगा, यह सातिराना दिमांग का खेल हो सकता है जिसे जांचकर्ता अधिकारी अनदेखा कर रहा है। मूल टीपी का एन्ट्री डिपों बैरियर में एन्ट्री किया है उसके बाद, चौथापर्त निर्मित टीपी का एन्ट्री एडू बैरियर और भालूवारा बैरियर में किया गया है।

मामले का प्रकाशन होते ही छाल परिक्षेत्र में खेला गया खेल
बैरियर प्रभारी नंद जी उपाध्याय के रहते हुए बैरियर रजिस्टर के पन्ना को फाड़कर ही बदल दिया गया और एक ही रायटींग से एन्ट्री कर दिया गया है। वनपाल नंदजी उपाध्याय ने लैलूंगा उप वन मंडलाधिकारी के सामने पेशी के दौरान स्वीकार किया की रजिस्टर में छेड़छाड़ हुआ है, अब हो गया है माफ कर दिजीये, ब्राम्हण आदमी हुं जैसा अपनी पिड़ा व ब्यथा गिनाने लगे! रजिस्टर में बदलाव करने वाले दैनिक वेतनभोगी तेजस्वी डनसेना है जिन्होने रजिस्टर के पन्ना फाड़कर अपने हैंड राइटिंग से पुन: लिखा है,वन विभाग के तरफ से इन लोगों को गोल्ड मेडल दिया जाना चाहिए। अगर हम हैंड राइटिंग का आगरा भेजकर जांच करवाते है तो सारे तथ्य खुलकर सामने आ जायेगा।
क्या उस पन्ने में हुआ ड्राइवर लोगों का हस्ताक्षर ड्राइवर ने किया है या एक व्यक्ति ने ही किया है? ड्युटी में जितने कर्मचारी तैनात है उनकी भी हस्ताक्षर जांच कराने पर सारे तथ्य खुलकर सामने आ जायेगा!

लैलूंगा उप वन मंडलाधिकारी के समक्ष बैरियर प्रभारी नंद जी उपाध्याय वनपाल ने स्वयं स्वीकार किया की बैरियर रजिस्टर से छेड़छाड़ हुआ है। अब चिंता का विषय ये है कि किसके कहने पे रजिस्टर बदला गया है क्यों बदला गया है कारण क्या है, बैरियर रजिस्टर को बदलने वाले तेजस्वी डनसेना दैनिक श्रमिक है जिनका पुरा के पुरा राईटिंग है, अगर जांचकर्ता अधिकारी चाहे तो टीपी काटने वाले और बैरियर रजिस्टर सुधारने वाले का राईटिंग जांच के लिये आगरा भेज सकता है दुध का दुध पानी का पानी हो सकता है।

भालूनारा वनोपज जांच नाका प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि टीपी क्रमांक 96/82 के माध्यम से वाहन क्रमांक JH07-M-3462 के माध्यम से 08नग सागौन 0.944 घ.मी.लकड़ी आया है जिसका गाड़ी चेंकिंग कर विधिवत इंद्राज किया गया है, उक्त वाहन में सत कुमार चौहान और पुरूषोत्तम ठेठवार आये हुए थे।
अब देखना यह है कि वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ क्या नंद जी उपाध्याय वनपाल बैरियर प्रभारी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराता है या नही!

शासकीय दस्तावेजों के सांथ छेड़छाड़ के कुटरचना मामले में नंदजी उपाध्याय वनपाल, तेजस्वी डनसेना के खिलाफ एफआईआर करके 420 का मामला दर्ज कराता है या नही, जिन्होने कुटरचित ढंग से दस्तावेज तैयार करके विभाग के छवि को धुमिल करते हुए विभाग को चुना लगाने का काम किया है।

वहीं काष्ठागार अधिकारी जिनका टीपी में हस्ताक्षर है तथा टीपी काटने वाले पुरूषोत्तम ठेठवार जिनके हैंडराईटींग से टीपी कटा है उनके विरुद्ध भी 420 का मामला दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाना चाहिए।
धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी उपाध्याय ने संरक्षण देते हुए , टीपी काटने वाले दोषी को बंचाते हुए,काष्ठागार से हटाकर उप वन मंडल कार्यालय में बैठा दिया हैं। मेरे द्वारा वन मंडलाधिकारी को पुछे जाने पर उनके द्वारा जवाब दिया गया थी ठेठवार को हम कार्य से पृथक कर दिये है जब तक जांच पूर्ण नही हो जाता तब तक बाहर रहेंगे। लेकिन पृष्टभूमि पर देखने के लिये कुछ और मिल रहा है, ठेठवार उप वन मंडल कार्यालय में ड्युटी कर रहा है।
इतने बड़े मामले को दबाने के लिए वन मंडलाधिकारी ने सारे जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले लिया है, जिसके कारण आज तक जांच की कार्यवाही पूर्ण नही किया है और ना ही कार्यवाही कर रहे हैं। दोषियों को बंचाने के लिये भरसक प्रयास किया जा रहा है।


