छत्तीसगढ़ जनजातिय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड
में जाबदर एवं दैनिक वेतन भोगियों को रिक्त पदों पर दिया सीधी भर्ती के तहत कर दिया नियमित
रायपुर / छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड, महालेखाकार के सामने बलौदाबाजार रोड पर स्थित कार्यालय में मुख्यालय कार्यपालन अधिकारी की मनमानी खुलकर सामने आया है! वनौषधी पादप बोर्ड के अंतर्गत जाबदर पर कार्यरत तथा दैनिक वेतनभोगी पर कार्यरत कर्मचारी को सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती का लाभ पहुंचाते हुए वाहन चालक, सहायक ग्रेड 03, भृत्य, डाक्टर, लेखापाल जैसे पदों पर समायोजन कर नियमित कर दिया गया है।
दरअसल मामला यह है कि वन विभाग के अधीनस्थ शाखा छत्तीसगढ़ जनजातिय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड रायपुर का है! जहां पर सेवानिवृत प्रधान मुख्य वन संरक्षक जे.ए.सी. एस.राव को मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाकर लंबे समय से बिठाया गया हैं।

उन्होने रिक्त पदों की पूर्ती करने के लिए बिना विज्ञापन जारी किए, बिना पेपर में प्रकाशन कराये, अपने अधीनस्थ अपने ही चहेते लोगों को जो वनौषधी पापद बोर्ड में जाबदर तथा दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत है उन्हे सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया के तहत समायोजित कर दिया गया है जो सर्वथा गलत है।
छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड में रिक्त पदों पर समाजोयन प्रक्रिया में धांधली किया गया है, कार्यरत दैनिक वेतनभोगी,वाहन चालक, चौकीदार को जो की वरिष्ठ है उन्हे वंचित कर दिया गया है और अपने चहेते लोगों को हि लाभ पहुंचाया दिया गया है।
उक्त विषय को लेकर शिकायत करने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मामला को कफन दफन करने के उद्देश्य से उनके द्वारा गुमराह करते हुए जांच की प्रक्रिया न अपनाते हुए गोल मोल जवाब देने का कार्य किया गया है।
जिन्होने इस भर्ती प्रक्रिया को किया है वही जांचकर्ता अधिकारी के रूप में पत्राचार कर रहा है जबकी सारी स्थिति उ स अधिकारी को मालूम है! जांचकर्ता अधिकारी द्वारा उक्त प्रकरण का विधिवत जांच किया जाना चाहिए था ताकी सारे तथ्य निकलकर सामने सके किन्तु ऐसा ना करते हुए यह लेख किया गया है कि, शिकायत में उल्लेख समस्त साक्ष्य 01 सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराये , समयावधि में दस्तावेज उपलब्ध नही कराये जाने पर अपास्त मानते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध किया जायेगा, येसा पत्राचार किया गया है।

जबकी शिकायत के आधार पर जांचकर्ता अधिकारी को की गई शिकायत प्रकरण पर विधिवत जांच किया जाना चाहिए था , लेकिन येसा कुछ भी नही किया गया है। जिन्होने इस प्रकार के भर्ती करके अविधिक ढंग से लाभ पहुंचाया है भला वो कैसे विधिवत जांच कर सकता है।
इसी को कहते है मनमानी चरम सीमा पर है, जब छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड में इस प्रकार के गुपचुप तरिका से लाभ पहुंचा जा सकता है तो छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ में क्यों नही किया जा सकता !
जबकी निगम,मंडल ,बोर्ड के लिये नियम तो बराबर होता है,कभी कभी येसा संदेह होता है कि संविदा पर रखे गये अधिकारियों का क्या बिगड़ सकता है,अगर शासन कार्यवाही करेगा भी को केवल पद से ही तो हटायेगा, इसी सोंच विचार धारा के सांथ छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड में खेल दिया गया है खेला!

छत्तीसगढ़ से बाहर के व्यक्तियों को सर्व प्रथम लाभ दे दिया गया है,और छत्तीसगढ़या लोगों को किया गया है वंचित, कहने मात्र को है,, छत्तीसगढ़ीया सबले बढ़ीया,, छत्तीसगढ़ीया मुख्य मंत्री को तो इस मामले में गंभीर होना चाहिए लेकिन वो भी ठंडा पड़ा हुआ है।
अब देखना यह है कि इस भर्ती प्रक्रिया पर कितना जोरों से जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है या फिर ठंडा बस्ता में डाल दिया जाता है उक्त मामले को लेकर हाई कोर्ट में जल्द ही जनहित याचिका दायर किया जायेगा ताकि शासन के इस प्रकार के लाभ सभी निगम मंडल बोर्ड को मिल सकें या फिर जल्द ही किये गये उक्त भर्ती प्रक्रिया निरस्त हो सकें।

