छत्तीसगढ़ सरकार ने धर्मांतरण को लेकर,लिया अहम फैसला स्वागत योग्य :- दुर्गेश सिन्हा पिथौरा
रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मार्च 2026 में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित किया है, जो अवैध धर्मांतरण पर सख्त रोक लगाता है। इस कानून के तहत लालच, जबरदस्ती या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 20 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 की मुख्य बातें:-
सख्त सजा: – सामान्य अवैध धर्मांतरण के लिए 7 से 10 साल की कैद और कम से कम ₹5 लाख का जुर्माना। महिला/नाबालिग/SC/ST/OBC: यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, या अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और ₹10 लाख से अधिक जुर्माना हो सकता है।
सामूहिक धर्मांतरण:- दो या अधिक व्यक्तियों का अवैध धर्मांतरण कराने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और ₹25 लाख या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
उद्देश्य:- प्रलोभन (Allurement), प्रपीड़न (Coercion), और धोखे (Misrepresentation) से होने वाले धर्मांतरण को रोकना।
विवाह के लिए!
धर्मांतरण:- विवाह के उद्देश्य से या विवाह के लिए धर्मांतरण को अमान्य माना जाएगा जब तक कि निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न किया जाए।
विरोध: – इस विधेयक को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने आपत्ति जताई है, जिसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश युवा मंच,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दुर्गेश सिन्हा (पिथौरा)ने बताया की यह कानून 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा, जिसे वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के हिसाब से अपर्याप्त माना जा रहा था।

