सिर्री पठारीमुड़ा में सीमांकन कार्यों का ग्रामीणों ने किया खुलकर विरोध,पटवारी रोशनी साहु एवं आरआई पत्रकारों को देखकर भाग खड़े हुए
रायपुर / छत्तीसगढ़ में लगातार राजस्व विभाग का मामला सामने आ रहा है, दलाल हावी है और किसान है परेशान, लोग पैसों के बल पर कहीं पर किसी भी जमीन को हंथियाकर अंदर ही अंदर अधिकारी कर्मचारियों से मिलकर सांठ गांठ करके किसी भी जगहों के जमीन को रिकार्डेट कर रिकार्ड दुरूस्त कर पट्टा तैयार कर लिया जाता है!
वैसे ही मामला ग्राम सिर्री पठारीमुड़ा में देखने को मिल रहा है, जो किसान अपने दो पिढ़ीयों से कास्तकारी करते हुए आ रहे है उस जमीन को किसी दुसरे व्यक्ति के नाम से पट्टा बना दिया गया है जो कि उचित नही है।
पठारीमुड़ा में घांस भूमि और आबादी भूमि का पट्टा बनवाकर बेचा जा रहा है, और बेंचने वाले का पठारीमुड़ा से दुर दुर तक नाता नही है। पटवारी आरआई और तहसीलदार की सांठ गांठ से पठारीमुड़ा में बाहरी व्यक्तियों का घांसभूमि एवं आबादी भूमि का पट्टा बना दिया गया है। किन्तु पठारीमुड़ा के अनेक ऐसे किसान जिसकी दो पिढी़ काबिज होकर पूर्व से काश्तकारी करते हुए आ रहे थे और वर्तमान में काबिज होकर कास्तकारी कर रहे है उसे रणनीति व बल पूर्वक बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।

दिनांक 23.03.2026 को सीमांकन किये जाने हेतु तहसीलदार द्वारा नोटिस जारी कर पठारीमुड़ा के किसानों को कोटवार के माध्यम से नोटिस तामिल किया गया था। नोटिस के आधार पर 23 तारिक को पटवारी,आरआई,पुलिस प्रशासन व संबंधित आवेदक के मुखत्यारआम महिला उपस्थित होकर सीमांकन कार्य प्रारंभ कर दिया लेकिन अनावेदक किसानों को नही बुलाया गया जबकी दोनो पक्षों की उपस्थिति में ही सीमांकन किया जाना चाहिए।
पटवारी श्रीमती रोशनी साहु और आरआई मोहन साहु के द्वारा ग्रामीणों को जमीन छोड़ने के दबाव बनाया जा रहा था, किसानों ने स्पष्ट रूप से अवगत कराया की पटवारी श्रीमती रोशनी साहु एवं आरआई मोहन साहु के द्वारा कहा गया की आप लोग जमीन के एवज में पैसा ले लों और जमीन छोड़ दें, जो पैसा मिलेगा उससे बाहर जमीन ले लो,उन लोग पैसा वाले है और पहुंच वालें है!
पटवारी के द्वारा इस प्रकार के पिड़ीत किसानों को सलाह देना कतई उचित नही है, जिस प्रकार से किसाने ने बताया और किसानों को कहा है उससे ऐसा प्रतित हो रहा है कि पटवारी सामने पक्ष से मिलकर किसानों को बेदखल करने में अपनी अहम भूमिका निभा पर रहे है !
खसरा नंबर 658 का पूर्व में सीमांक कार्य किया गया था तब, खसरा नंबर 660 के जमीन के अंदर उनका जरीब नही खिस्का लेकिन आज पुन: उसी खसरा नंबर 658 का सीमांकन कार्य किया गया तो जरीब का चाल येसा चला कि पुरा के पुरा 660 के हिस्सा का जमीन ही पुनऊराम केंवट पिता मोहन केंवट के दो पिढ़ीयों से काबिज जमीन को ले उड़ा!
मुखत्यारआम महिला की दादागिरी खुलकर सबके सामने आया, एकाधिकार अपनाते हुए किसानों की बोलती बंद करने के उद्देश्य से अपनी धमक के सांथ दस्तक दिये थे! लेकिन पत्रकारों के पहुंचते ही बोलती बंद हो गई,पर उत्तेजना इतना था कि किसी को कुछ भी बोले जा रही थी।
पिड़ीत किसानों को पटवारी लोग नचा रहे है बेंदरा नाच, पूर्व पदस्थ पटवारी रूपेश सिन्हा ग्राम पचरी निवासी के द्वारा रिकार्ड में काबिज चढ़ाने व पट्टा बनाने के नाम से चार किसानों से 50-50 हजार रूपया लिया गया था, लेकिन आज तक न काबिज चढ़ाया और ना ही पट्टा दिया। जिसके संबंध में ग्रामीण किसानों ने मंत्रालय से लेकिन कलेक्टर अनुविभागीय अधिकारी को शिकायत किया गया था लेकिन तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा उक्त शिकायत का विधिवत जांच नही किया गया और पटवारी रूपेश सिन्हा पचरी निवासी को बंचाया गया अंततः शिकायत में घिरे एसडीएम को बागबाहरा से भागना पड़ा।
तत्कालीन पटवारी रूपेश सिन्हा के द्वारा चार किसानों से 50-50 हजार रूपया के हिसाब से दो लाख रूपया लिया गया जिसकी पुष्टी किसानों ने किया है, एवंं उन चारों पिड़ित परिवारों के सदस्यों ने भी बताया है।
अब वैसा ही खेल वर्तमान में पदस्थ पटवारी श्रीमती रोशनी साहु के द्वारा किया जा रहा हैं, किसानों को सलाह दिया जा रहा है कि पैसा ले लो जमीन छोड़ दो या बाहर जाकर कहीं पर जमीन खरीद लो, जब शासन ऐसे जिम्मेदारी निभाने वाले लोक सेवक को गद्दी पर बिठायेंगें तो शासन प्रशासन और किसानों की बंठाधार निश्चित है।
किसानों के द्वारा लगातार शासन प्रशासन को शिकायत दर्ज कराये हुए है,उक्त शिकायत का जब तक विधिवत जांच नही हो जाता तब तक किसी भी प्रकार की सीमांकन कार्य नही किया जाना था!
किन्तु तहसीलदार साहब की जल्दबाजी समझ से परे जैसा लग रहा है, जब गरीब किसान शिकायत करें तो कोई सुनवाई नही वही पैसों के बल पर छाती तानकर चलने वाले आवेदन करें तो पल भर में सुनवाई उचित नही है। इस प्रकार के कार्य वर्तमान सरकार के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है, सरकार येसा और इतना छुट क्यों देकर रखा हुआ है।
सरकार कहती है हम किसान हितैषी सरकार है , लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी भी एंगल से नही लगता है कि किसान हितैषी सरकार है। गरीब किसान न्याय पाने के लिए दर दर ठोकरें खा रहे है,और सरकार बेनर पोस्टरों में किसान हितैषी बताकर वाह वाह लुट रहे है।
प्रफुल्ल शर्मा लगातार 18 साल से कोर्ट केस लड़ लड़कर थक चुके है तो अब मुखत्यारआम श्रीमती विजय लक्ष्मी शर्मा को खड़ा करती है,और मुखत्यारआम के द्वारा बेहुदा और बत्तमीजी से पेश आती है। लगातार किसानो को धमकाते है हमारी टीम जब मौके पर पहुंची तो मुखत्यारआम के द्वारा जोर जोर से चिल्लाते हुए देखने को मिला!
पटवारी लोगों के द्वारा खसरा नंबर को कई टुकड़ों में बांट दिया गया है, जिससे पिड़ीत किसान दिक्कतों से जुझ रहे हैं,ये वही मुखत्यारआम जो किसानो के खेतो में बिजली को कभी भी शिकायत करके कटवा देती है!
आज हुए सीमांकन कार्य का ग्रामीण किसानों ने आपत्ती दर्ज कराई है,उक्त सीमांकन कार्य से संतुष्ट नही है, किसानों के द्वारा किये गये शिकायतों का जब तक विधिवत जांच नही किया जाता है तब तक किसी भी प्रकार की सीमांकन कार्य न किया जावें!
पटवारी के द्वारा किसानों को उनकी जमीन छोड़ने के लिए उकसाना व दबाव डालना या जबरदस्ती करना एक अपराधिक कृत्य है। इसके लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS-IPC)और प्रासंगिक कानूनों के तहत निम्न धाराये लगती है:-

भारतीय न्याय सहिंता के तहत
धारा 351आपराधिक धमकी :- यदि पटवारी जमीन छोड़ने के लिए डराता या धमकाता है !
धारा 314/315 बेईमानी से संपत्ति का दुर्विनियोजन :- यदि वह जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है!
धारा 343 दस्तावेजों के सांथ धोखाधड़ी :- यदि पटवारी कागजात (खसरा/खतौनी) में हेरफेर करता है उन्हे नष्ट करता है या फर्जी हस्ताक्षर व दस्तावेज तैयार करता है।
धारा 228 झुठे साक्ष्य गढ़ना :- यदि वह रिकार्ड में गलत प्रविष्टि करता है !
धारा 166/167 लोक सेवक द्वारा कानून की अवग्या :- पटवारी एक लोक सेवक है यदि वह जानबूझकर कानून के विरूद्ध काम करता है या गलत रिपोर्ट बनाता है तो यह धारा कायम होता है।
ग्रामिणों के द्वारा बताये अनुसार से जिस प्रकार के श्रीमति रोशनी साहु पटवारी व आरआई मोहन साहु के द्वारा पैसा लेकर जमीन छोड़ने के लिये दबाव बनाया गया उस हिसाब से ग्रामिण उनके विरूद्ध एफआईआर प्रकरण दर्ज कराने के लिए मजबुर हो चुके है! लगातार मानसिक प्रताड़ना कर रहे है, मुखत्यारआम के द्वारा भी आदिवासी किसानों के महिलाओं के सांथ उनके घर में जाकर पूर्व में अमर्यादित व जाति सूचक गाली गलौच को लेकर एफआईआर कराने के लिए मजबुर है।
गणेश राम पिता लच्छन ग्राम पठारीमुड़ा के द्वारा बताया गया कि विगत 10-15 वर्षों से उक्त खेत में फल्ली व उड़द बोंते आ रहे थे बताया जा रहा था लेकिन जो महिला है मुखत्यारआम विजय लक्ष्मी का कहना था कि 02 वर्षों से गणेश राम रेघिया में उड़द बोंते आ रहा है बताया गया है। जिस प्रकार से दोनों के द्वारा बताया जा रहा है उससे स्पष्ट होता है कि वास्तविकता धरातल पर है न देने वाला को सहीं जानकारी है न बोने वाले को!
सारे तथ्य से ऐसा लगता है की रायपुर से जमीन पर ऑनलाइन बुआई और लुवाई हो रहा था केवल मानसिकता में व दस्तावेजों में लेकिन वास्तविक रूप में कास्तकारी का अपने दो पिढ़ीयों से पठारीमुड़ा के पिड़ीत किसान लोग करते हुए आ रहे है जिन्हे बकरा हलाल किया जा रहा है।

