महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत सरेकेल की बदहाली, गर्मियों के दिन में भी सरेकेल की गलियों में बह रही है छोटी गंगा
रायपुर / छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विष्णुदेव साय जी शासनकाल चल रहा है, शहर से लेकर गांवों तक विकास की गंगा बह रही है, लेकिन वास्तविकता तो महासमुंद विधानसभा के ग्राम पंचायत सरेकेल में देखने को मिल रहा है। सरेकेल महासमुंद विधानसभा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी संख्या वाली बस्ती है, सरकार विकसित भारत 2047 का संकल्प लेकर चल रही है किन्तु 2047 किसने देखा है, वर्तमान परिवेश में तो कुछ और ही दिख रहा है, गावों की बदहाली विकास के रथ को रोककर रखा हुआ है। क्या वास्तव में ग्राम पंचायत सरेकेल का कायाकल्प होगा या फिर येसे कहानियों में बस सुनने योग्य रहेगा।

क्या महासमुंद विधायक गांवों की कायाकल्प करेगा, विकास की गंगा बहायेगा,या फिर इसी प्रकार के गांव के गलियों गंदे पानी वाला छोटी गंगा बहते रहेगा ! गर्मियों के दिन में जिस प्रकार के गांव के गलियो में गंदगी है उससे भयावह स्थिति निर्मित हो सकती है, संक्रमण फैल सकता है और इसके लिये जिम्मेदार कौन होगा।


जब गर्मी के समय में हालात येसा है तो न जाने बरसात में हाल क्या होगा, ग्राम पंचायत मुख्यालय में इस प्रकार के विकास कार्य समझ से परे है। सरपंच का कार्यकाल दुसरा साल पूर्ण होने वाला है लेकिन विकास दुर दुर तक नजर नही आ रहा है।
वित्त मंत्री का बजट भाषण जोरो सोरो से रहा जिसमें गांव से लेकर शहर के तक के विकास के लिये रोड मैप तैयार किये हैं। कार्य के लिये हजारों करोड़ रूपया का बजट पेश किया है, क्या कागजों में बजट की दम घुटेगा या फिर वास्तव में धरातल पर देखने को मिलेगा।
क्या इस मामला को ग्राम पंचायत सरेकेल के सरपंच गंभीरता सें लेंगे या महासमुंद विधायक अपने क्षेत्र के विकास के लिए संकल्पित होंगे। शहर से लेकर गांवों की विकास का ढिढ़ोरा पिटने वाले सरकार फिरहाल असफल साबित नजर आ रहे हैं।
फिल्मों मे देखा था छोटी गंगा समझकर नाली में कुदा दिया।
लेकिन बिना नाली के सरेकेल में छोटी गंगा बह रहा है।

