छत्तीसगढ़ राज्य लघुवनोपज संघ में सचिव की मनमानी,
मेटास कम्पनी के गार्ड को आराम,दैनिक वेतनभोगियों का किया जीना हराम
रायपुर / छत्तीसगढ़ वन विभाग के अधीनस्थ संचालित छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ में सचिव की मनमानी से रेगुलर स्टाप और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी व श्रमिक परेशान है ! दरअसल बात यह है कि सहकारीता विभाग से आये हुए कर्मचारी ने अपने रूतबा से छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ में धाक जमाकर बैठ गई है,और तेन्दुपत्ता को वन विभाग से पृथक कर सहकारीता का पाठ पढ़ा दिया है जिसके कारण,वन विभाग से उपबजे कर्मचारी,उस सहकारिता विभाग वाली के दमनकारी निती से अपने आप को सहकारीता विभाग के कर्मचारी मानना चालु कर दिया है।
दरअसल तेन्दपत्ता मूल रूप से वन विभाग के ही शाखा है जो सदियों से चला आ रहा है किन्तु उन्हे अपने जननी से पृथक कल सौतेली मां के गोद में डालने का काम किया जा रहा हैं। सहकारीता के रूल्स नियम तान दिया गया है! वास्तविकन में अगर छत्तीसगढ़ राज्य लघुवनोपज संघ सहकारीता विभाग का है तो धान फेडरेशन को दे दिया जाये वहीं के कर्मचारी संचालन करेंगें और राज्य लघु वनोपज संघ के कर्मचारियों को रेगुलर वन विभाग में मर्ज कर दिया जाये!
जब से छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ में वर्तमान प्रबंध संचालक आये है तब से लघु वनोपज संघ पतन की ओर अग्रसर हो चुका हैं। पूर्व में भी लिखित रूप से कुछ महिलाओं ने शिकायत दिया था जिसमें उनके हरकत सामने आया था,उसी चीज को छुपाने के लिये लगातार नये नये कारनामे व हरकत करते जा रहे है!
राजनांदगांव के तेन्दुपत्ता गोदाम सुरक्षा श्रमिकों को एकाएक पृथक कर कार्यमुक्त करने का प्रयास किया गया है, भारीतादात में गोदाम सुरक्षा श्रमिक कार्य से वंचित हुए हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ नें मेटास कंपनी को ठेका दिया गया है जिसमें झाडू पोंछा करने,साफ सफाई,व सुरक्षा गार्ड कार्यरत है, उसके बावजूद भी श्रमायुक्त दर पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के शनिवार और रविवार अवकाश के दिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के ईरादा से दिन रात ड्युटी लगा दिया गया है।
यह एक प्रकार से शोषण है ताकि दैनिक वेतनभोगी प्रताड़ना झेल कार्य छोड़कर भाग जाये,फिर अपने चहेती चहेता को कार्य पर रख सकें।
रही बात जितने भी सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी जिनको कार्य पर रखे हुए है उन सबको तत्काल कार्यमुक्त करें, एक तरफ पेंसन भी ले रहे है, और दुसरे तरफ संविदा में 40-50 हजार वेतन दिया जा रहा है मोटर गाड़ी,आवास की सारी सुविधाएं दे रहे हैं जो सर्वथा उचित नही है!
येसे लुलुप्त प्रलोभी अधिकारी कर्मचारियों को सरकार आजीवन पट्टा दे दिया जाये ताकी ये जीवन भर मरते दम तक नौकरी कर सकें! जिस सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी को संविदा में रखकर उतना वेतन दे रहे है,उसी वेतन पर किसी बेरोजगार की जीवन बन सकता है लेकिन अंधेर नगरी चौपट राजा का खेल जारी हैं।
कोई भी पार्टी सत्ता में काबिज होता है तो माजरा येसा ही चलाते आ रहा हैं। बेरोजगार अपनी बेरोजगारी से तंग आकर आत्मदाह करते आ रहे है और,सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी अपनी जेब गरम करने में प्रसंन्न है!
वन मंत्री जी इस मामले को कितना गंभीरता से लेता है यह देखना है! अगर उचित कार्यवाही नही होता है तो आगे छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के बड़े बड़े कारनामें का खुलासा होने वाला है!