कोडार काष्ठागार में कार्यरत ग्रेडर का बात निकला सच, 2431 नग सागौन की फर्जी बिक्री,प्रबंध संचालक मंडल प्रबंधक की मिलीभगत
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के बारनवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत कोडार काष्ठागार डिपों संचालित होता है जहां पर लगभग करोड़ो रूपया का सागौन का घपला किया गया है जिसके संबंध में पूर्व में प्रकाशन किया गया था, शिकायत भी किया गया था लेकिन वर्तमान मंडल प्रबंधक ने फाईल को ठंडा बस्ता में डाल दिया!
कोडार काष्ठागार बनने से पहले यह डिपों बिरकोनी में संचालित होता था, बिरकोनी से हटाकर उक्त डिपों को कोडार जलासय के उपरी भाग में रोड किनारे लाया गया है। डिपों में विगत कई वर्षों से लकड़ी का हेराफेरी चलते हुए आ रहा है, लेकिन न किसी अधिकारी को मतलब रहा न कर्मचारी को लेकिन जब उस डिपो में कार्यरत ग्रेडर नें जब पोल खोली तो सबके आंखे खुली के खुली रह गई!
जब से कोडार काष्ठागार डिपों खुला है तब से एक एक रिकार्ड का अगर सुक्ष्म रूप से जांच किया जाए तो परत दर परत मामला का खुलासा हो सकता है।
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कोडार काष्ठागार डिपों में कार्यरत ग्रेडर के द्वारा मंडल प्रबंधक को लिखे हुए लेटर से उजागर हुआ है, उक्त ग्रेडर को सभी चीज पता है तभी पुरे मामले का पोल खोल दिया है।
उक्त सारे विवरण से मंडल प्रबंधक को अवगत कराया है , ग्रेडर ने लिखित रूप से बताया है कि सितंबर 2021 की स्थिति में काष्ठ की आमद, निर्वतन, और अंतर की जानकारी तैयार किया गया तो सारे कर्मकांड का खुलासा हुआ है।

निलाम में प्रस्तावित रखा गया काष्ठ आमद से ज्यादा नीलाम में रखा गया था,जिसमें 2431 नग 436.459 घन मीटर काष्ठ ज्यादा बढ़ोतरी हुआ है, इतनी मात्रा में काष्ठ बढ़ाेतरी कैसे हुआ है उक्त सागौन काष्ठ कहां से आया है, किसने भेजा और किसने बेंचा जांच का विषय है!
कोडार काष्ठागार डिपो का बड़ा कारनामा सबके सामने खुलकर आया है, ग्रेडर ने लेख किया है चालान क्रमांक 8382/04 दिनांक 01.09.2021 को POR मटेरियल चालान द्वारा डिपों में प्राप्त हुआ है, जिसका डिपों नंबर 78867 से 78874= 08 नग की जिसकी डिपों एलाट नंबर हुआ है लेकिन नीलाम में इस डिपों नं. की लट्ठा ही नही था।

माह मई 2021 से सितंबर तक के आमद में चालान में बल्ली को काष्ठ बना दिया गया है, अब बल्ली का काष्ठ बनना बड़ा गजब का खेला है, लेकिन नीलाम में उस डिपो नं. की काष्ठ नीलाम में नही है प्रत्येक चालान में 10 से 15 नग बल्ली को लट्टा बनाया है !

अनुज्ञा पत्र में भी लट्टा बल्ली बेचते है उसे रास्ता में कुछ मत हो करके अनुज्ञा पत्र में जितना नग बेंचता है उसे किसी भी लाट में लिखकर नग बढ़ाकर घन मीटर को यथावत जारी कर दिया जाता है!

येसा दिमांक लगाने वाला वह अधिकारी कौन है जो इस प्रकार के कार्य को अंजाम दिया है, येसे प्रतित होता है की जब से डिपों खुला है तब से येसा ही कार्य चला आ रहा है,न जाने कितने ट्रक सागौन खपा दिये होंगे।
बड़ी बात ये है कि उस समय टीपी कौन काटता था, टीपी में राईटिंग किसका है, रिपोर्ट कौन तैयार करता था यह भी जांच का विषय है, जब वर्ष 2021-22 में इतनी भारी मात्रा में जंगल से रातों रात माल आ गया , तो न जाने 20-22 वर्षो में कितना माल खपा दिया होगा!
मनी रसीद में भी वाहन चालक से नियमानुसार वसुली किया जाता है लेकिन मनी रसीद में राशि बंचाकर कम राशि का उल्लेख कर दिया जाता है!
ग्रेडर के पत्र ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की सारी पोल खोलकर रख दिया है करोडों का घपला किया गया है जिसका खुलासा हुआ है।
न जाने जब से डिपों खुला है तब से कितना हजारों करोड़ो रूपया का सेंध लगा दिया होगा!
येसा प्रतित होता है कि आंखों के सामने ट्रको ट्रक काष्ठ निकल गया होगा और प्रबंध संचालक को इसकी भनक तक नही लगा!
वर्तमान में प्रबंध संचालक है जो मामला को ठंडा बस्ता में डालने का प्रयास कर रहे है जिसके कारण लगातार प्रकाशन के बाद भी कार्यवाही नही कर रहे हैं।
कहीं येसा ना हो कि 2431 नग सागौन लट्टा को रिकार्डि में दुरूस्त कर सुधारने का प्रयास किया जाये, ताकी लिपा पोती कर मामला को कफन दफन किया जा सके।
कौन काटता रहा टीपी कौन बनाता रहा जानकारी यह भी जांच का विषय है।
कोडार काष्ठागार डिपों जब से खुला है तब से कौन टीपी काटता था किसकी राईटींग है कौन गोस्वारा बनाकर जानकारी वरिष्ठ कार्यालय भेजता था इसकी सुक्ष्म रूप से जांच आवश्यक है ! अगर जानकारी गलत था तो आज तक प्रबंध संचालक और मंडल प्रबंधक ने कार्यवाही क्यों नही किया, अगर जानकारी सहीं है तो 2431 नग 436.459 घ.मी.कैसे बढ़ गया है,
इतना भारी तादात में काष्ठ का आमद हो जाना और उसका बिक्री भी हो जाना चिंता का विषय है! ग्रेडर ने अपने पत्र में यह भी लेख किया है कि रात्री गस्त के समय POR मटेरीयल सागौन चिरान तथा 01 नग सायकल को चालान क्र. 8070/21 दिनांक 14.01.2022 के द्वारा काष्ठागार डिपों में भेजा गया था जबकी मटेरीयल सागौन चिरान को नीलाम दिनांक 08.01.2022 को नीलाम में प्रस्तावित कर दिया जिसका लाट क्र. 2075 स्टेक 5640 में 16 नग = 0.077 घन मीटर है!
आखिरकार किस अधिकारी या कर्मचारी ने इतनी मात्रा में काष्ठ , 2431 नग = 436.459 घन मीटर सागौन के लट्ठा को पचा गया! छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड में अधिकारी कर्मचारी की पाचन क्षता बहुत अधिक है ,अच्छी है जो लकड़ी जैसे चीजों को पचा दे रहे है जब एक वर्ष में इतने सारे गंभीर मामला सामने आया है तो वर्ष 1998 से खुलासा होगा तो न जाने क्या होगा !
यह घपला छ.ग.राज्य वन विकास निगम को नंगा करके रख दिया है, करोड़ो रूपया के सागौन काष्ठ को पचा गया है! सीधे तौर पर इसे चोरी ही कहा जा सकता है, जो 2431 नग लट्टा को डिपों से रातो रात पार्सल कर दिया,,,, क्या इसकी भरपाई प्रबंध संचालक करेंगें, या बारनवापारा परियोजना के मंडल प्रबंधक करेंगें!
जिस प्रकार से 2431 नग लट्ठा 436.459 घन मीटर काष्ठ का अवैधानिक रूप से आमद हुआ है डिपों में तो उस लकड़ी को अनलोडिंग हेमाल लोगों ने किया होगा, और अवैधानिक रूप से प्राप्त काष्ठ जब बाहर गया तो उस लकड़ी का लोडींग भी हेमाल लोगों ने ही किया होगा उन लोगों के उपर भी कार्यवाही किया जाना आवश्यक है।
मतलब इससे स्पष्ट होता है कि इस कारनामें में भी हेमाल लोगों की अहम भूमिका है,पता करने पर स्पष्ट हो जायेगा कि किस ठेकेदार के गाड़ी में कितना माल लोड किया गया है।
जंगल में मात्रा से अधिक कटाई हुआ है जिसे डिपों में लाकर,अविधिक ढंग से विक्री किया गया है, पत्र में लिखे सारे तथ्य सबके सामने उजागर करने में महति भूमिका निभाई हैं।
2431 नग सागौन लट्ठा 436.459 घन मीटर की काष्ठ घपला में मामले में प्रबंध संचालक, मंडल प्रबंधक, उप मंडल प्रबंधक, रेंजर, डिप्टी रेंजर के उपर कार्यवाही करते हुए तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। जिन्होने मिल जुलकर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम को चुना लगाने का कार्य किया है।
पूर्व में लगातार प्रकाशन के बाद भी न कोई कार्यवाही न कोई जांच, न दोषियों को आया आंच, कहां से चला है तीन पांच, वर्तमान मंडल प्रबंधक फाईल को ठंडा बस्ता में डाल दिया है जिसके कारण मंडल प्रबंधक कार्यवाही करने में डर रहे हैं।
मंडल प्रबंधक द्वारा कार्यवाही नही किया जाना संंदेह पैदा करता है, जितने अधिकारी कर्मचारी गलत किये है तो उनके उपर कार्यवाही करें!नही तो जिन्होंने विभागीय गोपनीयता को भंग किया है येसे लोगों के उपर अच्छी सी कार्यवाही किया जाना चाहिए।
बिरकोनी डिपों व कोडार काष्ठागार डिपो जब से बना है तब भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। ग्रेडर ने जो रिपोर्ट बनाया है वो सही है, जिसे छुपाने का प्रयास निगम के अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा कराया जा रहा है !

