धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार हो रहा है खुलासा, कर्मचारी अधिकारी की सांठ गांठ से भ्रष्टाचार को दिया जा रहा है अंजाम
रायपुर / छत्तीसगढ़ में धरमजयगढ़ प्रसिद्ध हो चुका है विभागिय कर्मचारियों के द्वारा बड़े बड़े कारनामे किये गये जिसका लगातार प्रकाशन भी हुआ है किन्तु कार्यवाही जीरो बटे सन्नाटा है। दरअसल मामला धरमजयगढ़ वन मंडल के दुर्गापुर सरिया कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से जारी पत्र में कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अनुरोध पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाए जाने का उल्लेख है, जिसमें क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए वन भूमि उपलब्ध कराने की बात कही गई है। प्रस्तावित 290.399 हेक्टेयर वन भूमि के बदले लगभग 580.800 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण की योजना सामने आई है। इसके लिए मरवाही, धरमजयगढ़ और सुकमा वनमंडलों में भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच धरमजयगढ़ क्षेत्र का पुराना प्रकरण भी फिर चर्चा में आ गया है, जहां पूर्व में डी बी पावर के कोल ब्लॉक से जुड़े मामले में वन भूमि प्रदान की गई थी और उसके बदले विभिन्न स्थानों जिनमे छाल वन परिक्षेत्र के लोटान, लामीखार, बेहरामुड़ा, पुसलदा , एडुकला और धरमजयगढ़ परिक्षेत्र के नागदरहा में वृक्षारोपण दर्शाया गया था। उस समय करोड़ों रुपये की राशि भी जमा कराए जाने का उल्लेख अभिलेखों में मिलता है, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ पाई है
प्राप्त जानकारी अनुसार क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तो यह जिज्ञासा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या यह प्रस्ताव उन्हीं स्थानों से जुड़ा है जहां पहले वृक्षारोपण दिखाया गया था। विशेष रूप से धरमजयगढ़ के छाल और धरमजयगढ़ परिक्षेत्र में पूर्व में जिन स्थलों पर वृक्षारोपण दर्शाया गया, क्या वही क्षेत्र फिर से प्रस्ताव में शामिल हैं, इस पर स्थिति अभी भी संशयपूर्ण बनी हुईं है यदि ऐसा पाया जाता है कि पूर्व में दर्शाए गए स्थलों को ही पुनः प्रस्तावित किया जा रहा है, तो इससे पूरे प्रकरण की प्रकृति और भी गंभीर हो सकती है। वहीं यदि नए क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, तो पुराने कार्यों की वास्तविक स्थिति और भी जांच का विषय बन जाती है।
आने वाले समय में यह खुलासा महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित वृक्षारोपण के लिए चिन्हित भूमि और पूर्व में दर्शाए गए स्थलों के बीच क्या संबंध है।
धरमजयगढ़ वन मंडल आरोपियों दोषियों को बचाने का अड्डा बन चुका है।
धरमजयगढ़ वन मंडल के काष्ठागार डिपों से लेकर बैरियरों की कहानी ने पिछले बार तहलका मचा रखा था जिसके संबंध में शिकायत भी दर्ज हुआ था और जांच की प्रक्रिया भी चल रहा था लेकिन अचानक से जांच प्रक्रिया को लैलूंगा एसडीओ ने ठंडा बस्ता में डाल दिया है।
दरअसल मामला यह था कि धरमजयगढ़ काष्ठागार डिपो से 06 नग सागौन लट्ठा 0.343घ.मी.लकड़ी का अनुज्ञा पत्र टीपी काटा गया था। जिसका इंद्राज काष्ठागार डिपो के बैरियर में भी हुआ है और एडू बैरियर में जब एन्ट्री हुआ तो 8 नग 0.944 घ.मी. इंद्राज हुआ, फिर वहां से आगे खरसिया परिक्षेत्र के बैरियर भालुनारा में 8 नग सागौन लट्ठा 0.944 घन मीटर इंद्राज हुआ है।
उक्त मामला का प्रकाशन होते ही धरमजयगढ़ लन मंडल में हड़कम मच गया और रिकार्ड सुधरवाने को होड़ में लग गये,दोषी कर्मचारी! भाग दौड़ करके एडू बैरियर की रजिस्टर को फड़वाकर दुसरा पन्ना बदल दिया गया है जो जांच के दौरान स्पष्ट हो चुका है। जिस पन्ना को बदला गया सभी राइटिंग एक ही ब्यक्ति का है गुप्त सुत्रो से पता चला है छाल रेंजर के कहने पर पन्ना बदला गया है।
एक वन रक्षक को बचाने के लिये रेंजक जो है शासकीय रिकार्ड को ही बदल दिया,यहीं से स्पष्ट होता है कि न जाने विभाग में और क्या क्या नही होता होगा।
जांच के दौरान मूल टीपी अनुज्ञा पत्र नही दिखाया गया जिसमें बैरियर के सिल सिक्का लगा रहता है।
येसा संदेह किया जा रहा है कि कहीं अनुज्ञा पत्र को तो फोटो कापी करके चार पर्तों में तो नही बना लिया गया होगा जो डिपो से निकलने पर 06 नग 0.344 घ.मी. जैसे ही डिपो से बाहर निकला माल लकड़ी तो 8 नग 0.944 घ.मी.हो गया है।

लकड़ी क्रय करने वाले कर्मचारी सत कुमार चौहान वन रक्षक और पुरूषोत्तम ठेठवार दैनिक श्रमिक रजिस्टर सुधरवाने के लिये पहुंचे एक बैरियर में तो सफल हो गया लेकिन खरसिया के भालुनारा बैरियर में रिकार्ड सुधरवाने में असफल रहा।

जांच कर्ता अधिकारी मामला को दबाये बैठे है!जिसके कारण बिलासपुर मुख्यवन संरक्षक को पत्र लिखकर दुसरे जांच कर्ता अधिकारी से जांच कराये जाने का मांग किया गया है लेकिन किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही किया जाना संदेह को जन्म देता है।
भ्रष्टाचार इतना पैर पसार चुका है इससे कोई अछुता नही रहा, विभाग में पैसा बोलता है जिसके कारण बड़े बड़े कारनामा और मामला कफन दफन हो जाता है।
क्या धरमजयगढ़ वन मंडल की तस्वीर बदलेगा या फिर चोर बाजार की छाया में ढंका रहेगा यह देखना है।

