मोदी का गारंटी,और वर्तमान सरकार की मंच में दिये गये आश्वासन पुरा नही हो पाने पर दैनिक वेतनभोगी पुन:आंदोलन की राह पर
रायपुर / छत्तीसगढ़ में राजनैतिक पार्टी अपने अपने हिसाब से सरकार चलाने का प्रयास किया। किन्तु किसी भी पार्टी ने यह नही सोंचा की समस्त विभागों में जो दैनिक वेतनभोगी कार्य करते हुए आ रहे है उनका क्या होगा।
पूर्ववर्ती सरकार ने जन घोषणा पत्र में नियमितीकरण करने का वादा किया था सत्ता में आते ही,नियमितीकरण का मामला पालेसी मेटर बनकर पांच साल घुंमता रहा और अंत में कुछ नही हो पाया।
वर्तमान सरकार अपने मोदी की गारंटी में दैनिक वेतनभोगी, अनियमित, संविदा कर्मचारियों का 100 दिन के भीतर कमेटी गठन कर निर्णय लेने की बात भी ठंडा बस्ता में चला गया! जबकी वर्तमान के तमाम मंत्री जब विपक्ष में रहे तो हमारे मंच में ही नियमितीकरण किये जाने तथा स्थायीकरण किये जाने का घोषणा किया था, लेकिन सत्ता हासिल होते ही,ये कह रहे है कि लास्ट में करेंगे।
इस बार मतदाता समझदार हो चुके है,बताने की आवश्यकता नही है,अगर किसी को भूख लगा है और आप खाना नही दे रहे है,और जब भूख खत्म हो जायेगा तब आप खाना देंगें तो आपके खाना का कोई मतलब ही नही हैं।
मतलब देर से किया हुआ न्याय भी अन्याय के सामान है!
वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी लगातार 48 दिनों तक हड़ताल में रहे जो माननीय वन मंत्री जी द्वारा आश्वासन दिया गया था आज वो साल भर होने जा रहा है किन्तु पुरा नही हो पाया है इसलिये दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में काफी नराजगी है!
माननीय वन मंत्री जी जल्द ही वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एवं श्रमिकों के लिये वित्त विभाग से चर्चा कर भेजे गये प्रस्ताव को पास कराने का कष्ट करेंगें ताकि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को राहत मिल सके नही तो अगस्त सितंबर से पुन:अनिश्चित कालीन हड़ताल में जाने के लिये बाध्य होंगें।