धरमजयगढ़ के जंगलों में वन विभाग की नाक के नीचे कोयले का अवैध उत्खनन जोरों पर
रायपुर /छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ वन मंडल में अवैध उत्खनन जोरो पर चल रहा है, धरमजयगढ़ वनमंडल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ के सिसरिंगा, तेजपुर स्थित लालमाटी और बोरो वनपरिक्षेत्र के जंगलों में माफियाओं द्वारा बेखौफ होकर पीसी (पोकलेन) मशीनें लगाकर कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे है। आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरा काला खेल राजस्व और वन विभाग की भूमि पर खुलेआम चल रहा है, राजस्व विभाग के अधिकारी और वन विभाग के अधिकारी घोर निंद्रा में सोये हुए हैं।

जंगलों को छलनी छलनी कर रहे माफिया लोग
सूत्रों के अनुसार, बोरो और लालमाटी के घने जंगलों के भीतर मशीनों की गूंज सुनाई दे रही है। माफियाओं ने यहाँ गहरी खुदाई कर कोयला निकालना शुरू कर दिया है। घने जंगल का फायदा उठाकर प्रशासन की नज़रों से दूर अवैध खदानें संचालित की जा रही हैं, जिससे न केवल शासन को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है।

घरघोड़ा में पकड़ाया ट्रेलर बना बड़ा सुराग का जड़
हाल ही में घरघोड़ा थाना क्षेत्र में अंतर्गत अवैध कोयला का परिवहन करते हुए एक ट्रेलर वाहन को पकड़ा गया था। सूत्रों से यह बात निकलकर सामने आई थी कि उक्त वाहन में लदा कोयला धरमजयगढ़ के जंगलों से ही निकाला गया था। इस घटना के बाद से ही कवायस लगाया जा रहा है कि धरमजयगढ़ के भीतर कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिस पर अब मुहर लगती दिख रही है।
शासन प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल, वन विभाग मौन से ऐसा प्रतित होता है कि अधिकारियों की संलिप्तता है।
जंगलों के भीतर भारी भरकम पीसी मशीनें चल रही हैं, लेकिन स्थानीय वन विभाग और पुलिस प्रशासन इस बात से अनजान बना हुआ है। ग्रामीणों के मन में अब कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं!
क्या इतने बड़े पैमाने पर हो रहे उत्खनन की जानकारी सच में बीट गार्ड डिप्टी रेंजर, रेंजर, और एसडीओ डीएफओ को नही होगा…? क्या माफियाओं को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है…? आखिर क्यों वन विभाग की गश्ती टीमें इन मशीनों तक नहीं पहुँच पाई कारण क्या है?
जंगलों के सीने को चीरकर निकाले जा रहे इस ‘काले सोने’ के अवैध कारोबार ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि खबर
प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह अवैध कारोबार यूँ ही बदस्तूर जारी रहेगा।
? सवाल यह है किः
क्या वन विभाग और पुलिस को सच में इसकी भनक नहीं है?
या फिर माफियाओं के रसूख के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं?
जंगलों की बर्बादी और राजस्व की इस चोरी पर कब होगी कार्रवाई?
जंगल में मोर नाचा किसने जाना, अगर अधिकारी कर्मचारी जंगलों में गस्त नही करेंगे तो हालात ऐसा ही रहेगा। धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी तो चोरी चकारी करने वालों और ज्यादा संरक्षण देते है,इन सबसे उसको कोई फर्क पड़ने वाला नही है, बल्की ताजपोशी करके, और उच्च स्थान में पदस्थ करता है।
धरमजयगढ़ काष्ठागार डिपो के मामला को सुलझा नही पाया बल्की उक्त मामला को कफन दफन करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी वन मंडल पर फर्जी नियमितीकरण हुआ,फर्जी सीधी भर्ती हुआ, लाख शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नही किया गया।


