छत्तीसगढ़ के धर्मांतरण के मामले संसद में गुंजा,02 नन की गिरफ्तारी में मचा भूचाल
रायपुर / छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दो कैथोलिक मिशनरी सिस्टर्स (नन) की गिरफ्तारी को तस्करी के आरोपों में हुई गिरफ्तारी के विरोध में विपक्ष के सांसदों ने सोमवार को दिल्ली में संसद परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला
25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीन आदिवासी युवतियों के साथ यात्रा कर रही दो ननों और एक युवक को रोक लिया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि ये लोग युवतियों को धर्मांतरण के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा ले जा रहे थे। मामले की सूचना जीआरपी को दी गई और सभी को भिलाई थाना-3 स्थित दुर्ग जीआरपी चौकी लाया गया।
बरामदगी और आरोप
आरोपी युवक के पास तीन आधार कार्ड पाए गए।
एक डायरी मिली जिसमें कई राज्यों के नाम, पादरियों के फोन नंबर और सात लड़कियों की तस्वीरें थीं।
कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह मानव तस्करी और धर्मांतरण का संगठित मामला है।
पीड़ित पक्ष का पक्ष
तीनों युवतियां नारायणपुर के ओरछा की रहने वाली हैं।
युवती कमलेश्वरी की मां बुधिया प्रधान ने कहा, “बेटी को हमने खुद भेजा था ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।”
परिजनों ने लड़कियों को खुद काम के लिए भेजने की बात कही, जबकि जीजा अवस लाल ने ऐतराज़ जताया कि उन्हें जानकारी नहीं दी गई।
विपक्ष का हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:
“छत्तीसगढ़ में दो ननों को उनकी आस्था के कारण जेल भेजा गया। यह भाजपा-RSS का भीड़तंत्र है। यह एक खतरनाक पैटर्न है जो अल्पसंख्यकों के सिस्टेमैटिक उत्पीड़न की ओर इशारा करता है।”
प्रियंका गांधी ने कहा:
“बिना कानूनी आधार के ननों की गिरफ्तारी हुई है। भाजपा शासन में अल्पसंख्यकों को बदनाम किया जा रहा है। यह धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।”
केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और ननों की तत्काल रिहाई की मांग की।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा:
“भाजपा सरकार धर्मांतरण के नाम पर राजनीति कर रही है। कार्रवाई को सार्वजनिक करें और निष्पक्ष जांच कराएं।”
भाजपा का पलटवार
भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कहा:
“कांग्रेस पार्टी पूरी तरह धर्मांतरण की समर्थक है। पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस शासन में धर्मांतरण को संरक्षण मिला है। अब विष्णुदेव सरकार इस पर सख्त कानून लाएगी।”
बजरंग दल का पक्ष
ज्योति शर्मा (प्रदेश संयोजिका) ने कहा:
“यह केवल नौकरी दिलाने का मामला नहीं है, बल्कि सुनियोजित मानव तस्करी और धर्मांतरण है। आरोपी युवक और ननों के पास संदिग्ध दस्तावेज और जानकारी मिली है।”