छत्तीसगढ़ के संस्कार को परंपरा को संजो नही पा रहे है सरकार,विकास के चक्कर में विनाश
रायपुर / छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया… अब केवल एक मात्र कहावत बनकर रह गया है। यहां के संस्कार, रीतिरिवाज, परंपराएं और भोलापन संकट से जूझ रहा है। इन्हें लूटने में परदेशियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। वनों से आच्छादित छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही है। और ये सब हो रहा है। सरकार के शह पर…अन्यथा लोटा लेकर आने वालों की क्या बिशाद…थी कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, रीतिरिवाज, और परंपराओं के साथ कोई खिलवाड़ कर सके।
चार पैसा कमाने लोटा लेकर आने वालों को एक बार देख लो और छत्तीसगढ़ के मूल लोगों को देख लो…आज प्रदेश में मजबूत स्थिति में कौन हैं। इन्हें यहां तक पहुंचाना वाला कौन है। आज प्रदेश में दिग्गज नेता के रूप में उभरने वाला कल हॉकर था। तो चेतक में रायपुर की गलियों में घुमने वाला नेता और बिजनेसमेन बना बैठा है। किसी ने सरकारी जमीन कब्जा कर पूंजी बनाए तो किसी ने गरीब की झोपड़ी तोड़कर पूंजी बनाए।
छत्तीसगढ़ में ऐसे ही लोगों को पनपते देख पैसे कमाने की लालच में तोमर बंधु जैसे राक्षसों ने भी प्रदेश में शरण लेनी शुरू की, जिसका नतीजा सबके सामने है। तोमर बंधु अकेला परदेशिया नहीं जो प्रदेश को लूटने आया हो। शहर के चौक-चौराहों पर नशीले ड्रग बिक रहे हैं। जुआ-सट्टा चल रहा है। कोचिया शराब बेच रहे हैं। इन पर कार्यवाही भी हो रही है। जो खानापूर्ति के सिवाय कुछ नहीं…सरगना हमेशा खुलेआम घुम रहे हैं।
प्रदेश में अपराध के मूल में कहीं न कहीं छत्तीसगढ़ में लोटा लेकर आने वाले परदेशिया ही मिलेंगे। जो जल्दी पैसा कमाने की लालच में प्रदेश को लूटने से बाज नहीं आ रहे हैं। और इसमें उनके पहले से जमे हुये परदेशिया भाई पूरा-पूरा सहयोग कर रहे हैं!
छत्तीसगढ़ के अस्तित्व को बंचाना छत्तीसगढ़ के हर नागरिक का जिम्मेदारी है!गिल्ली डंडा,बांटी भांवरा,भकाचुम,डंडा पचरंगा,गोंटी अमराऊल,रेसटीप,खोखो,
कबड्डी,बिल्लस,कसाड़ी ,छु छुअऊल, गोंटा,ये सभी खेल नंदा गया है लुप्त हो गया है।
विकास के राह पे चलने वाले, चलाने वाले लोग इसे दबा रहे है भूला रहे है!