लकड़ी तस्करों पर वन विभाग की कार्रवाई, लकड़ी की अवैध परिवहन पर कसावट
रायपुर / छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन विभाग की टीम ने देर रात अवैध लकड़ी तस्करी करते हुए एक पिकअप वाहन को जब्त किया है। यह मामला वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र के रजखेता जंगल का है।जानकारी के मुताबिक़ तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल से लकड़ी ले जा रहे थे। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन टीम को आते देख चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।
फरार आरोपियों की तलाश जारी जब्त वाहन से लकड़ी बरामद की गई है, वहीं तस्करी में प्रयुक्त पिकअप से नंबर प्लेट गायब पाई गई। फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश में जुटा हुआ है।
तस्करों पर वन विभाग की कार्रवाई वहीं 6 अगस्त को सरगुजा जिले के सीतापुर में बिना अनुमति लिए पेड़ो की कटाई कर उत्तरप्रदेश ले जा रहे लकड़ी तस्कर को गिरफ्तार कर लिया था। शासन प्रशासन के बनाए गए नियमों को ताक में रखकर बिना अनुमति के काटे गए पेड़ समेत वाहन को वन विभाग ने जब्त किया था। लकड़ी समेत जब्त वाहन को पकड़ने के बाद वन विभाग उसे अपनी अभिरक्षा में रखे हुए थे।
उत्तरप्रदेश में खपा रहे लकड़ियां
उल्लेखनीय है कि, लकड़ी कटाई में पूर्ववर्ती सरकार की दी ढिलाई से क्षेत्र में लकड़ी तस्करों की अच्छी खासी फौज खड़ी हो गई है। वह अब किसानों से सांठगांठ कर उसे झांसे में लेकर बिना अनुमति लिए उसके पेड़ो की कटाई कर उत्तरप्रदेश में खपा रहे है। लकड़ी के इस अवैध काम मे मोटी कमाई होता देख अंतर्राज्यीय लकड़ी तस्करों का गिरोह भी क्षेत्र में सक्रिय हो गया है।
किसानों की आड़ में काट रहे हैं तस्कर पेड़ क्षेत्र में लकड़ी कटाई को लेकर लकड़ी तस्कर गिरोह के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गया है। लकड़ी के अवैध कारोबार मे होने वाली मोटी कमाई की वजह से बढ़ते प्रतिस्पर्धा के कारण क्षेत्र में कई बार तस्करों के बीच खूनी संघर्ष की स्थिति निर्मित हो चुकी है। लकड़ी कटाई को लेकर बढ़ते जा रहे प्रतिस्पर्धा एवं प्रशासन की कार्रवाई से बचने के बीच कई लकड़ी तस्कर सिस्टम का रुख अपनाने लगे है। वो किसानों के माध्यम से एसडीएम कार्यालय में पेड़ कटाई की अनुमति के लिए आवेदन लगाने लगे है।
किसान को साल में केवल दस पेड़ काटने की अनुमति
एसडीएम कार्यालय से अनुमति मिलने के बाद वो उसकी आड़ में हजारों पेड़ काट देते है। गौरतलब है कि एसडीएम कार्यालय से किसान को साल में केवल दस पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है। इस अनुमति की आड़ में वो किसान की जगह लकड़ी तस्कर 10 की जगह सैकड़ो पेड़ काट डालते हैं। ग्रामीण जब जरूरत से ज्यादा काटे जा रहे पेड़ो पर आपत्ति दर्ज कराते है तब वो अनुमति दिखा उनका मुंह बंद करा देते है। वहीं कुछ लकड़ी तस्कर गिरोह ऐसा है जो शासन प्रशासन के नियमों को धज्जियां उड़ाते हुए बिना अनुमति के ही बेखौफ होकर पेड़ों की कटाई करा देते है।