बलौदाबाजार वन मंडल के कोठारी, बारनवापारा रेंजरों की लापरवाही से लगातार हो रही है चिलत की शिकार
रायपुर /छत्तीसगढ़ के वनमंडल बलौदाबाजार के बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र से मृत चीतल का मामला सामने आया है। बार अभ्यारण्य के वन परिक्षेत्र कार्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर कक्ष क्रमांक 108 के सड़क किनारे एक चीतल मृत अवस्था में कई दिनों से पड़ा रहा। लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी,इससे स्पष्ट होता है बारनवापारा के अधिकारी कर्मचारी अपने कर्तब्यों का पालन विधिवत रूप से नही कर रहे हैं। बड़े ही ईमानदार के जैसे प्रतिमाह दौरा दैनंदिनी प्रस्तुत कर यात्रा देयक लेकर विभाग को चुना लगाया जा रहा है।
अगर कर्मठ अधिकारी कर्मचारी पूर्णनिष्ठा व जिम्मेदारी के सांथ अपनी सेवाएं देता तो,शायद यह घटना सामने नही आता, लेकिन जिस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है विभाग के लिये बड़ी ही क्षति है।
अगर बंदर को जंगल का राजा बना दिया जाये तो हाल क्या होगा। ये से ही हाल वर्तमान में बारनवापरा परिक्षेत्र का है,बंदर को राजा बना दिया गया है, बंदर कह रहा है कि मेरे भाग दौड़ में कोई कमी है क्या??
कमी है या नही ये तो लगाता चितलों के शिकार से पता चल रहा है।
सूत्रों की मानें तो राहगीरों को जब दुर्गंध आई तो उन्होंने गाड़ी रोककर देखा तो एक चीतल मृत अवस्था में सड़-गल रहा था। इधर पत्रकारों ने मृत चीतल का वीडियो बनाया और फोटो भी खींचा है।राहगीरों से प्राप्त जानकारी के बाद मौके वनरक्षक मिथिलेश ठाकुर ने स्वीकार किया कि मृत प्राणी चीतल (हिरण प्रजाति) का है और उसे तेंदुए ने शिकार किया है लेकिन पूर्णत: गलत है, लगातार गांवो से सैकड़ो की झुंड में कुत्ता जंगल की ओर जाते है और चितल हिरण का शिकार करते हैं।

फिलहाल चौंकाने वाली बात यह रही कि वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी मीडिया से मिली है जबकि वन विभाग पेट्रोलिंग दावा करता है कि साथ ही कोर और बार अभ्यारण क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग किया जाना चाहिए ! लेकिन जब चीतल की जानकारी क्षेत्र के बीट गार्ड को डिप्टी रेंजर को रेंजर को पता नही इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी कितने जिम्मेदार है!
और कितने जिम्मेदारी के सांथ अपनी सेवाएं दे रहे है, और विभाग के निर्देशों का कितना पालन कर रहें है, बहरहाल वन विभाग के सूत्रों की मानें तो मृत वन्य प्राणी के पास कैमरे लगाए जाने चाहिए थे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकार किस जानवर ने किया है। लेकिन विभाग को जानकारी ही नही तो कैमरा दूर की बात है मिथलेश ठाकुर वन रक्षक की घोर लापरवाही खुलकर सामने आया है, जब मिथलेश ठाकुर ने स्वयं स्वीकार किया है तो छ.ग.सिविल सेवा आचरण नियम 1965-66 तहत कार्रवाई करते हुए तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। उसी प्रकार धनेश्वर ध्रूव वन रक्षक के उपर कार्यवाही करते हुए निलंबित किया जाना चाहिए।

इधर प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी गोपाल वर्मा ने स्वीकार किया कि उन्हें वनरक्षक द्वारा सूचना मिला कि तेंदुए ने शिकार किया है, वहीं एक अन्य वनरक्षक धनेश्वर ध्रुव ने दावा किया कि कक्ष क्रमांक 108 उसके बीट में आता है और उसने कैमरा लगाया था। कर्मचारियों की बयान बाजी में विरोधा भास ने विभागीय लापरवाही को और उजागर कर दिया है। फिलहाल उक्त मृत चीतल का शव सड़ चुका है।

कोठारी व बारनवापारा वन परिक्षेत्र अधिकारी का लापरवाही खुलकर सामने आया है, अगर कोठारी वन परिक्षेत्र से लेकर बारनवापारा परिक्षेत्र के जंगलों में प्रशासनिक स्तर से उच्चाधिकारयों का निरीक्षण दल भेजकर सुक्ष्म रूप से जांच कराया जाये तो परत दर परत सारे के सारे पोल खुलते जायेंगे।
प्रतिदिन गांव में बसाहट करने वाले कुत्तों की झुंठ सुबह से शाम तक जगल प्रवेश कर जाते है कुत्तों के द्वारा चितल व हिरण का प्रतिदिन शिकार किया जा रहा है किन्तु कोई ध्यान नही दे रहे है सारे साक्ष्य को दबा दिया जा रहा हैं ।
बारनवापारा परिक्षेत्र के चर्चा में है प्रभारी रेंजर गोपाल प्रसाद वर्मा जो शासकीय वाहन में शराब लेकर घुमते रहते है,दिन रात फिल्ड कर रहा है तो इतने मात्रा में क्यों वन प्राणियों का शिकार हो रहा है यह जांच का विषय है!
गोपाल प्रसाद वर्मा उप वन क्षेत्र पाल लगातार अपराधों के घेरे में घिरे हुए है,उसके बाद भी वन मंडलाधिकारी बलौदाबाजार ने किस हिसाब में उन्हे बार नवापारा परिक्षेत्र का चार्ज दिया है,इसकी शिकायत मुख्य मंत्री वन मंत्री तक किया जायेगा और समय आने पर महालेखाकार में काली पुड़िया दिया जायेगा।
गोपाल प्रसाद वर्मा अपने हरकतों से बाज नही आ रहा है रेंजर बन गया हुं करके फिर अश्लील गाली गलौच देना चालु कर दिया है। ये से भी कटघरे के घेरे में है गोपाल प्रसाद वर्मा प्रभारी रेंजर बारनवापारा फर्जीवाड़ा मामले में जेल भी जा सकते है बारनवापारा प्रभारी रेंजर गोपाल प्रसाद वर्मा नशे में चुर रहने के कारण वन्यप्राणियों का संरक्षण नही कर पा रहे हैं।
वन्यप्राणियों की लगातार हो शिकार के लिये दोषि रेंजर है जिसकी लापरवाही खुलकर सामने आया है!

