धरमजगढ़ के काष्ठागार डिपों में कार्यरत दैनिक श्रमिक की काली कारामात
रायपुर / छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिला के अधीनस्थ धरमजयगढ़ वन मंडल के काष्ठागार डिपों में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की काली कारामात आप जानकर रह जायेंगे दंग ।
दरअसल मामला यह है कि धरमजयगढ़ वन मंडल में धरमजयगढ़ मुख्यालय पर ही रोड किनारे वन काष्ठागार कार्यालय स्थित है, उक्त कार्यालय में विगत कई वर्षों से लिपिक ही पदस्थ नही हुए हैं। जब से डिपो खुला है तब से दैनिक श्रमिक लगातार टीपी काटने का काम कर रहे है जो विभागीय व बाहरी लोगों से मिले हुए है!
गुप्त सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुआ है कि उक्त दैनिक श्रमिक विभाग को चुना लगाने में कोई कसर नही छोड़ रहे है, अनेको बार लकड़ी सप्लाई किया जा चुका है।
दो नंबर के कामों के एवज में खुब राशि कमा रहे है और आये दिन नशे के हालत में रहते है, खुब पार्टीयां चलता है,एक दैनिक श्रमिक का वेतन 10 हजार रुपया है तो प्रतिदिन शराब पीने के लिये कहां से पैसा पाता है ? वही एक दैनिक श्रमिक धरमजयगढ़ में पदस्थ मुख्यलिपीक को पार्टी देता है शराब पिलाता है ये भी एक चिंता का विषय है?
अगर वेतन के पैसा से शराब पिता होगा तो,घर कैसा चलाता होगा यह सब गंभीर विषय है!
टीपी कौन काटता है यह भी जांच का विषय है, इतने बड़े बडे घटना घटीत हो रहे है उसके बाद भी लिपीक का पदस्थापना नही होना यह भी संसय का विषय है, चाहे काष्ठागार धरमजयगढ़ का मामला हो या उत्पादन ईकाई धरमजयगढ़ का मामला हो दोनो जगह पर विगत कई वर्षों से लिपीक की पदस्थापना नही हुई है यह भी एक गंभीर विषय है कि क्या कारण है कि उन दोनो जगहों पर लिपीक की पदस्थिति नही की जा रही हैं।
टीपी काटने में अंदरूनी खेल चल रहा है, जिसे एक दैनिक श्रमिक बखुबी तरीका से खेला चल रहा है , न जाने कितने टीपी काटे होंगे,और कितने विभाग को चुना लगायें होंगे विभाग के अधिकारी को पता ही नही है! टीपी में किसका राईटिंग है, डिपों के गेट रजिस्टर में किसका राईटींग है समझ आ जायेगा मामला, और यह जांच का मामला है।
अपने करीबी रेगुलर कर्मचारी को लाभ पहुंचाने के लिये विभाग को लगा दिया चुना, और या भी सुनने में आया है कि उस दैनिक श्रमिक के द्वारा यह भी काहा जाता है कि मुझे काष्ठागार डिपो से कोई हटा ही नही सकता,अगर मैं चाहुं तो डिपों को उबार दुंगा, अगर मैं चाहुं तो डिपों को डुबा दुंगा !
नशे से ध्रूत आदमी अकसर सही बोला करते है, अंदर में जो छुपे राज है वह नशे में ही बाहर आता है, नशे के हालत में इस प्रकार से कहने वाले आदमी विभाग के प्रति कितने जिम्मेदार और ईमानदार है इसी से पता चलता है।

एक येसा मामला सामने आया है कि धरमजयगढ़ वन मंडल के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है!
सागौन लकड़ी के गोला में बढ़ोतरी,कैसा टीपी कटा और कैसे लकड़ी बढ़ा बड़ा अजब गजब का खेल है।
टीपी कटता है 06 नग सागौन लकड़ी का और आधे रास्ते में वह लकड़ी 08 नग कैसे हो जाता है!
या तो टीपी काटने वाला गलत है या फिर टीपी में माल ले जाने वाला गलत है!
लेकिन गंभीरता से देखा जाये तो यहां पर दोनों का कारामात सामने खुलकर सामने आ रहा है, टीपी काटने वाला 06 नग काटा है लेकिन वही लकड़ी 08 नग हो जाता है गाड़ी नंबर दुसरा है, जब दुसरे वन मंडल में गाड़ी प्रवेश करता है तो गाड़ी नंबर बदल जाता है मतलब गजब का खेला चल रहा है।
टीपी जारी करने वाले उस अधिकारी, कर्मचारी को निलंबित करो जिन्होने टीपी जारी किया है, अगर दैनिक श्रमिक ने टीपी काटा है और अधिकारी का हस्ताक्षर लिया है तो उस दैनिक श्रमिक को कार्य से पृथक करों जिन्होने विभाग को बदनाम कर अधिकारी के गर्दन में रस्सी लटकाने का काम किया है।
टीपी कटने के बाद माल बढ़ा है बीच रास्ते में तो उस लकड़ी खरीददारी कर लकड़ी फड़वाने वाले को कर्मचारी को निलंबित तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।
रेंजर अवकाश में चला जाता है तो वनपाल मैंडम को चार्ज में देकर चला जाता है, ऐसे समय में खेला चलता है!
उक्त मामले का सारा दस्तावेज मेरे हांथ में है, वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ समय रहते येसे फर्जी लोगों को काष्ठागार डिपों से तथा उत्पादन ईकाई से तत्काल हटाने का कष्ट करें नही तो लगातार प्रकाशन होता रहेगा।
बहुत सारे राज उत्पादन ईकाई परिक्षेत्र व काष्ठागार डिपों का छुपा हुआ है,समय आने पर जल्द ही उजागर होगा।
निविदा में धांधली का राज खूलेगा,
एक एक राज से धरमजयगढ़ वन मंडल का काज बिकेगा!
लाखों करोड़ों रूपया का पोल खुलेगा,
अपनी साख बचाने के लिये, सारा गुत्था सजेगा!
पर भी धरमजयगढ़ की काली करतूत की डंगा बंजेगा!
चल रे चमेली बाग में तेरा फुल ही सजेगा, तेरा फुल ही सजेगा!

