बड़े झाड़ के जंगल को दलालों ने अवैध तरीके से बेचा, पटवारी हुए निलंबित
रायपुर / छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला के धरमजयगढ़ में फर्जी तरीके से जमीन बेचने वाले पटवारी पर कार्यवाही करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह कार्यवाही धरमजयगढ़ के एसडीएम प्रवीण भगत ने की है, मामला यह है कि ग्रामीण रोशन खेस पूर्व बीडीसी रायमेर द्वारा इस फर्जीवाड़े की शिकायत धरमजयगढ़ के पूर्व एसडीएम को की गई थीं, जिसके बाद रोशन द्वारा इसकी शिकायत कलेक्टर को भी की गई और मुख्यमंत्री को भी की गई, वहीं अब इस मामले में बड़ी कार्यवाही देखने को मिली है!
तहसीलदार कापू के प्रतिवेदन 21 जुलाई 2025 के अनुसार ग्राम रायमेर प. ह. नं. 8 तहसील कापू स्थित मूल रूप से बड़े झाड़ के जंगल की भूमि खसरा नं. 467 से रकबा 1.243 हे. भूमि को अवैध रूप से विक्रय करने की शिकायत प्रथम दृष्ट्या सही पाया गया! जिसके फलस्वरूप राकेश साय प. ह. नं. 9 ग्राम कमराई (तत्कालिक पटवारी हल्का नं 8 ग्राम रायमेर) को छ. ग. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत होने के फलस्वरूप साय को छ. ग. सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि में पटवारी का मुख्यालय तहसील कार्यालय धरमजयगढ़ नियत किया गया है और उक्त निलबंन अवधि में केवल जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
राजस्व विभाग के पटवारी ने सरकारी जमीन को निजी बनाकर बेच दिया है। मामले का खुलासा होने के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल दोषी पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले में उक्त शिकायतकर्ता ने बताया की उसे भूमि सम्बंधित ईश्तहार और ऑनलाइन जानकारी में पता चला की इस तरह से घोटाला किया जा रहा है। राज्य में सरकार बदलने के बाद भी राजस्व विभाग में फर्जीवाड़े का खेल बंद होने का नाम नही ले रहा है। एक मामले में शिकायत के बाद जब इतने बड़े खेल का भांडा फूटा है तब आप समझ सकते हैं कि ऐसे पटवारियों के हौसले कबसे बुलंद होंगे और उनके द्वारा कितना फर्जीवाड़ा किया गया होगा। उक्त मामलें में पहले रोशन द्वारा एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई थीं, जिसमें लिखा गया था कि रायमेर के शासकीय जमीन को खसरा नं. बटांकन कर बाहरी व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पट्टा तैयार कर दलालों के द्वारा बिक्री फर्जी रजिस्ट्री करने बावत् किया गया है जो निम्न लिखित खसरा नं. है- खसरा नं. 479/2 (2.023 हे.), 467/36 (0.874 हे.), 467/25 (0.695 है.) 467/23 (0.548 है.) 310/10/ख/1 (0.974 है.), 310/10/ख/2 (2.011 हे.) 310/10/2 (2.758 हे.) है। उक्त बटांकन नं. पूर्व पांचशाला खसरा में उल्लेखित नहीं है जो कि सरासर गलत एवं फर्जी है। निलंबन की अवधि तक तो शासन का आदेश हैं कि निलंबित पटवारी का मुख्यालय तहसील कार्यालय धरमजयगढ़ नियत किया गया। निलबंन अवधि में शासन के नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।

अनेकों मामला येसा है धरमजयगढ़ में कि आप जानकर रह जायेंगें दंग, गोरखधंधा तेजी से चल रहा है जमीन दलास सक्रीय हो चुके हैं।

