धरमजगढ़ काष्ठागार डिपों में चल रहा है खेला, 06 नग सागौन का टीपी काटकर आधे रास्ते में हो गया 08 नग सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ दोषियों पर हो एफआईआर दर्ज
रायपुर / छत्तीसगढ़ के वन विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, जिसमें धरमजयगढ़ वन मंडल सबसे आगे, जहां भारी मात्रा में जंगल में अतिक्रमण हो रहे है, भारी मात्रा में हांथी मर रहे है,और भारी मात्रा में फर्जीवाड़ा हो रहे हैं। उसी कड़ी में एक घटना धरमजयगढ़ काष्ठागार डिपों का है जहां पर सीसी कैमरा लगे रहने के बाद भी काष्ठ ईमारती का पार्सल हो रहा है धड़ल्ले से, डिपो में काम करने वाले एक दैनिक श्रमिक का कारनामा जो खुलकर सामने आया है।
षड़यंत्रकर्ता बड़े ही दबंगई के सांथ खरसिया वन परिक्षेत्र के भालुनारा बेरियर पहुंचकर कर्मचारियों को रजिस्टर बदलने या फिर सफेदा लगाकर सुधारने की नसिहत दे डाला जो कि अपराध को बढ़ावा दे रहा है!
जब लकड़ी क्रय करने वाले रेगुलर कर्मचारी और दैनिक श्रमिक वहां तक भी पहुंच गये ! तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मामला कितना गंभीर हो सकता है, न जाने बिते कई वर्षों में कितना माल पार्सल किया होगा ?
सरकारी कर्मचारी अपने ही विभाग को लगाया चुना

धरमजयगढ़ काष्ठागार डिपों में केवल नाम मात्र का सीसी कैमरा लगा है, लेकिन जबसे लगा है तब से बंद है कुछ दिन चला होगा वो अलग बात है किन्तु विभाग को चुना लगाने के लिये यह कैमरा बंद किये हुए है ताकी तस्करी करने में आसानी हो सके!
काष्ठागार डिपों में कार्यरत दैनिक श्रमिक, जो अपनी काली कारामात से धरमजयगढ़ वन मंडल में चारचांद लगा दिये है, किसके राईटिंग से टिपी कटता है, और वर्तमान में किसके राईटींग से कटा है जांच का विषय है, विगत 10 वर्षो का रिकार्ड जांच किया जाये आवश्यक हो गया है , उस राइटिंग की जांच के लिये आगरा भेजा जाये जिससे स्पष्ट हो जायेगा कि किसकी कारामात विगत कई वर्षों से चल रहा है।
लकड़ी के किरचा करे घांंव न,
लकड़ी के किरचा करे घाव न!
फोकटे के नौकरी हाबे भाव न,
मुड़ी पिरावे,चाहे कनिंहा पिरावे,
मुड़ी पिरावे,चाहे कनिंहा पिरावे,
इंहा डिपो ले मैं तो नई जांव न,नई जाव न!
धरमजयगढ़ वन काष्ठागार डिपों में सुरक्षा के दृष्टि से सीसी कैमरा लगाये हुए है लेकिन उस कैमरा को बंद रखने का बहुत सारे फायदें भी है। जैसे की वर्तमान में निकाली गई लकड़ी की कोई जानकारी नही ! कैमरा सुरक्षा के लिये लगाया गया है, लेकिन काष्ठागार डिपों में वर्षों से सुरक्षा कर रहे टीपीदार के आंखों से कुछ बंच पायेगा तब न, उनकी आंखे सेटेलाइट से कोई कम नही है ।
वर्षो से शासकीय मकान को हंथियाये हुए है, क्या उस शासकीय आवास का किराया उसके वेतन से कटौती करता है या विभाग मुफ्त में सारी सुविधाएं दे रहा है!
टीपी काटने में अंदरूनी खेल चल रहा है, जिसे एक दैनिक श्रमिक व कम्प्युटर आपरेटर बखुबी तरीका से निभा रहा है , न जाने कितने टीपी काटे होंगे,और कितने बार विभाग को चुना लगायें होंगे।
डिपों के मसिहा एक दैनिक श्रमिक जो सागौन के लकड़ी को गोला में परिवर्तन कर देता है, बढ़ोतरी कैसा करता है, और टीपी कैसे काटा जाता है उसके लिये महारत हासिल किये हुए है! 06 नग सागौन लट्टा आधे रास्ते में 08 नग कैसे हो जाता है यह काम एक रेंजर नही कर सकता क्योंकि 02 नग के कारण अपने नौकरी को दांव में नही लगा सकता, लेकिन येसा काम केवल एक दैनिक श्रमिक ही कर सकता है अपने जुगाड़ के लिये!
वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ , लापरवाही बरतने वाले उस रेगुलर कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करें , तथा फर्जीवाड़ा कर विभाग को चुना लगाने वाले दैनिक श्रमिक को तत्काल कार्य से पृथक किया जावें!
जब से प्रकाशन हुआ है तब से यह मिर्गी की बिमारी कोरबा से झटका मार रही है, मामला धरमजयगढ़ का है लेकिन पिड़ा कोरबा में बैठी षड़यंत्रकारी को हो रहा है! मामले की जांच हेतु लैलुंगा एसडीओ को दिया गया है!
क्या सुक्ष्म रूप से जांच करते है या पिछले बार निविदा घपला में आरोपी को बंचा दिये,वैसे कहीं इन लोगों को बचाने का प्रयास ना कर दें!

