छाल कोल माइंस से कोयला परिवहन में मनमानी , वनोपज जांच नांका में नही होता है एन्ट्री, रायगढ़ वन मंडल में चल रहा है मनमानी
रायपुर / छत्तीसगढ़ वन विभाग के रायगढ़ वन मंडल में शासन आदेश का हो रहा है अनदेखा , धडल्ले से हो रहा है कोयला का परिवहन , वन विभाग के जांच नाका में किसी प्रकार का कोई एन्ट्री नही हो रहा है।
जबकी शासन आदेश है कोयला परिवहन के लिये भी अनुज्ञा पत्र की आवश्यकता होती है, क्या छाल स्थित कोल माइंस खदान से कोयला बिना अनुज्ञा पत्र के परिवहन किया जा रहा है! वनों और पहाडडियों के बीच से कोयला खनन किया जा रहा है क्या वन विभाग की निगरानी है या भगवान भरोसे चल रहा है।
छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में कोयले की परिवहन में बिल्कुल जांच नाका में एन्ट्री होता है लेकिन रायगढ़ जिला में कोयला परिवहन को कोई लेखा जोखा नही है।

छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001
अधिसूचना क्रमांक एफ7-7-व.सं./2001 दिनांक 25अगस्त 2001- भारतीय वन अधिनियम 1927(1927का सं.16) की धारा 41 तथा 42 के साथ पठित धारा 76 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग में लाते हुए,राज्य सरकार एतदद्वारा वनोपज के अभिवहन को विनियमित करने के लिये नियम बनायी गयीचाहिए।
सके आधार पर निम्नलिखित वनोपज के लिये परिवहन अनुज्ञा पत्र जारी करने के लिये शुल्क निर्धारित की गई है। जिसमें कोयला 7 रूपया प्रतिटन है।

वह मार्ग येसी हो जिससे वनोपज परिवहन किया जाना है, मार्ग में वनोपज जांच नाका में अनुज्ञा पत्र अभिवहन पास की इंद्राज किया जाना आवश्यक है!

किन्तु रायगढ़ वन मंडल में उक्त नियमों का पालन विधिवत पालन नही किया जा रहा है, भालुनारा बैरियर से हजारों की तादात में रोज कोयला गाड़ी वाहन जुगर रहे है किसी भी वाहन के द्वारा पीट पास, अनुज्ञा पत्र का चेकिंग नही कराया जाता है, बैरियर में एन्ट्री नही कराया जाता है।

जबकी उक्त मार्ग से अविधिक ढंग से लकड़ी परिवहन होने की आशंका है, केयला गाड़ी में ही लकड़ी पार किया जा सकता है जिस हिसाब से बैरियर में वाहनों का ना तो चेकिंग होता है,ना हि अभिवहन पास की एन्ट्री होता है।
वन मंडलाधिकारी रायगढ़ एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी खरसिया को उक्त मामले को संज्ञान में लेकर कार्यवाही करना चाहिए।

