ठेकेदार द्वारा सुखा नाला में पुलिया निर्माण के लिये बेश कीमती सागौन पेड़ों की कटाई ,नही लिया गया वन विभाग से अनुमती
रायपुर / छत्तीसगढ़ में गरियाबंद जिले के छुरा विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम जटियातोरा और कनसिंघी के मध्य सुखा नाला पर सेतु विभाग द्वारा स्वीकृत पुलिया निर्माण कार्य को ठेकेदार द्वारा शुरुआत करते ही उन पर अनेकों गंभीर अनियमितताएं एवं आरोप सामने आये हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में लगी ठेकेदार फर्म पर कीमती सागौन के हरे-भरे पेड़ों को जेसीबी मशीन के द्वारा उखाड़ने दिये जाने तथा उसे रोड़ किनारे फेंकने का आरोप लगाया है। वास्तव में सागौन पेड़ को काटने के पूर्व वन विभाग से विधिवत स्वीकृति लेना था लेकिन ठेकेदार के द्वारा सारे नियमों को तार तार करते हुए बिना परमिशन के सागौन जैसे पेड़ों की कटाई कर दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक सड़क बनाने के नाम पर जिन पेड़ों को हटाया गया है, उनकी कोई नीलामी या विधिवत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, इससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचने की कोशिश की गई है।
इसके साथ ही मौके पर बड़े पैमाने पर अवैध मुरूम खनन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रही है, मतलब शुद्ध रूप से ठेकेदार पैसा बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
ठेकेदार द्वारा बनाई गई वैकल्पिक सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामिण लोग नाराज हैं और बताया गया कि सड़क पर धूल-मिट्टी इतनी अधिक है कि राहगीरों को पार करते समय पूरा शरीर धूल से सराबोर होना पड़ता है। इससे लोगों को असुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा हैं।
ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन से मांग की है कि पेड़ों की अवैध कटाई और मुरूम खनन की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही वैकल्पिक सड़क को मानकों के अनुसार बनाया जाए ताकि पुलिया निर्माण के दौरान लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। प्रशासनिक स्तर पर अभी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों ने निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
क्या शासन प्रशासन ठेकेदार की लापरवाही पर कड़ाई से कार्यवाही करेगें या या नेतागिरी के तह तले दब जा रहे है। क्या वन विभाग ने ठेकेदार के उपर कार्यवाही की है या नही ये भी सवाल का विषय है।

