बिलासपुर में बूंद-बूंद को तरसे लोग, 300 करोड़ की अमृत योजना फैल,करोड़ो खर्च के बाद भी गंदा पानी
पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर
रायपुर / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लाख मशक्कत के बाद भी फ्लाप नजर आ रही है, करोड़ों रुपये की लागत से बनी अमृत मिशन योजना अब सवालों के घेरे में है। 300 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बिछाई गई पाइप लाइन से न तो लोगों को नियमित रूप से पानी मिल पा रहा है और न ही साफ पानी। कई इलाकों में बीते करीब दो महीनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे मोहल्ले के लोग शासन के कार्यशैली से बेहद नाराज नजर आ रहे हैं।
पानी की समस्या से परेशान वॉर्ड नंबर 16 कुडुदंड के मोहल्लेवासियों ने आज पार्षद के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। लोगों का कहना है कि पिछले लगभग दो महीने से उनके घरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है लोग पानी को तरस रहे है। जिन घरों में पानी आ भी रहा है, वह पानी पीने योग्य ही नहीं है। पानी इतना गंदा और मटमैला है कि उसका इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो गया है, पानी देखकर येसा लगता है पुरा बिलासपुर बिमारी के चपेट में आने वाला है।

मोहल्लेवासियों ने बताया कि हालात ऐसे हो गए हैं कि पीने के पानी के लिए उन्हें दूसरे लोगों के घरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं ,इससे रोजमर्रा का जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। पार्षद और स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृत मिशन योजना का मकसद हर घर तक साफ और पर्याप्त पानी पहुंचाना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उल्टी नजर आ रही है।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा, तो यह योजना का कोई मतलब नही है और जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
लोगों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस समस्या का तत्काल निराकरण किया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक लोगों को साफ और नियमित पानी देता है।
कहीं 300 करोड़ की लागत मिट्टी में तो नही मिल जायेगा।

