वन परिक्षेत्र पिथौरा के जम्हर बीट में सागौन की हो रही है अंधाधुंध कटाई, एक पेड़ मां के नाम हो रहा है फ्लाप
रायपुर / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के वन परिक्षेत्र पिथौरा में जम्हर बीट है, कक्ष क्रमांक 242, जम्हर के जंगल में सागौन के सैकड़ों बड़े – बड़े पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर दिया गया है। जंगल में मोर नाचा किसने जाना, वास्तव में जंगल राज ही चल रहा है, येसा प्रतित हो रहा है यहां पर कोई अधिनियम लागू ही नही होता है!
वन परिक्षेत्र पिथौरा के प्रभारी रेंजर व सागौन मामले के आरोपी सीताराम चौधरी मामले की पटकथा क्या था।?

जम्हर बीट गार्ड पश्चिम डिप्टी रेंजर नन्कुशिया साहू प्रभारी रेंजर को कुंभकर्णी निंद्रा के लिए करोड़ों के सागौन कटाई के लिए आलाधिकारी मौन क्यों?
मीडिया को जानकारी नहीं दी जा रही है जिला वन मंडल अधिकारी मौके पर जाकर जांच किए हैं अब देखते हैं कि किसके उपर गाज गिरता है। बहुत से सागौन लकड़ी में हैमर अभी तक नहीं लगा है क्योंकि वन विभाग में जब किसी लकड़ी की तस्करी होती है तो हैमर लगाया जाता है। यह भी भारी संदिग्ध परिस्थितियों मिलीभगत को जाहिर करता है जिसकी जमकर चर्चा हो रही है।
खानापूर्ति के नाम से केवल वन रक्षक को ही निलंबन करते हुए वनरक्षक को ही प्रताड़ित किया जाता है।
जबकि जिम्मेदार जितना वनरक्षक है उतना ही सहायक परीक्षेत्र अधिकारी और वन परीक्षेत्र अधिकारी भी होता है।
*जंगल में अवैध कटाई का मामला: वन विभाग आंकड़े छुपाने में जुटा* जंगल में चारों ओर कटे हुए ठूंठ और बड़े-बड़े सागौन के लट्ठे अब भी पड़े हुए हैं, लेकिन वन विभाग वास्तविक आंकड़े छुपाते हुए नजर आ रहे है, और बचने का प्रयास कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि 100 से अधिक हाल ही में कटे बड़े – बड़े ठूंठों पर अब तक न तो हैम्बर लगाया गया है और न ही किसी प्रकार की मार्किंग की गई है।

मिली जानकारी के अनुसार इस जंगल में 200 से अधिक सागौन पेड़ों की कटाई हुई है, जबकि वन विभाग इस संख्या को केवल 60 पेड़ बता रहे हैं। कार्रवाई के डर से आंकड़ा छुपा रहे हैं वन विभाग हमेशा निचले स्तर के कर्मचारियों को टारगेट कर उनके खिलाफ कार्रवाई करता है! लेकिन यहां पर तो दोषी हर अधिकारी कर्मचारी की होती है, 200 से अधिक सागौन के पेड़ काट दिए हैं ।
मौके पर पड़े कटे पेड़ के अवशेष को अगर एकत्र किया जाए तो करोड़ो का अनुमान लगाया जा सकता है ।
वन विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा सिर्फ वन रक्षक के ऊपर कार्यवाही कर खानापूर्ति कर मामले को कफन दफन कर दिया जाता है, जंगल राज चलाने वालों पर कारवाई बहुत ही जरूरी है, छोटी एक ठूंठ की कार्रवाई होती है तो वाहवाही बटोरने में पीछे नहीं रहते अधिकारी, और इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदारी लेना चाहिए।
अधिकारियों के खिलाफ भी कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है अब देखते हैं क्या होता है।: बहुत बड़ी लापरवाही ही नहीं तस्करी है अपने बचाव के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाना बहुत ही गलत है !

