महासमुंद जिला के ग्राम सरेकेल में धुमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्माष्टमी
रायपुर / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के ग्राम सरेकेल में ग्राम युवा मंच समिति के द्वारा हर्षोल्लास एवं बाजागाजा के सांथ कृष्ण जन्माष्टमी मनाया गया ! पुरे गांव को तोरण फताका से सजाया गया था, यही एक येसा गांव है जहां लंबे समय में कला को जिंदा रखने का काम किया गया है ! सरेकेल अपने आप में एक ऐसा गांव है जिनका परिचय देने की आवश्यकता नही पड़ता,
इस गांव के कलाकारों ने लंबे समय से कला को संजोये रखा हुआ है, झलप क्षेत्र का पहला येसा गांव है,जहां पर आस पास के गांव रामलीला ,हास्य नाटक, देखने के लिये आते थे।
यहां के प्रसिद्ध रामलीला ,नल दयमंती, महाभारत, बब्रुवाहन, मौरध्वज, भरथरी,ढोला मारू,आल्हा उदल जैसे नाच मंचन होता था।
आपको बता दें कि यही एक येसा गांव है जो गांड़ा बाजा , साज सज्जा व संगीत ने पुरे छत्तीसगढ़ में अपनी अलग ही पहचान बनाई थी, दुरदर्शन में भी चलता था,येसे गांड़ा बाजा को संजोये रखने वाले जिन्हे लालबुटी के नाम से जाना जाता है आज भी सरेकेल के भूमि में कला को जिंदा रखा है!
सरेकेल अपने आप में कला का गढ़ है,यहां पर अच्छे अच्छे कलाकर ने लंबे समय से मंचन किया है, नारायण सिंह ध्रूव , पिरीत राम सिन्हा (चौकीदार),महेश बरिहा,परस राम खड़िया, आनंदिराम खड़िया, आनंदराम खड़िया, आनंदराम बरिहा,बेदराम पटेल,शंभु लाल चौहान,अंगद ध्रूव,(डुमरपलिहा), रघुनाथ पटेल,गोपीचंद पटेल, भूषण साहु, सुकालु राम बघेल, सालिकराम बघेल, पिरीत राम साहु, झंगलु राम ध्रुव, अवधराम साहु, हेरहा राम साहु,तिरिथ राम साहु ,पुकराम यादव, राजकुमार निषाद, छबीराम बरिहा, रामकुमार निषाद, रोहित पटेल, राजेन्द्र पटेल, रामकुमार सिन्हा, रूपचंद पटेल,मनोज निषाद,चिंतादास वैष्णव,उत्तम दास वैष्णव,लालाराम पटेल,येसे अनेक बुजूर्ग व युवाओं ने कला को संजोये रखा था!
और आज भी सरेकेल के युवा सांथी कला को जिंदा रखने का काम कर रहे है, बड़े ही धुमधाम से कृष्ण जन्माष्टमी मनाया गया, पुरे गांव में शोभा यात्रा निकाला गया। हर चौंक चौराहों पर मटकी फोड़ दही लुट का कार्यक्रम चला,तत्पश्चात साम को बर चौक में पुरे ग्रामवासियों ने मटकीफोड़,दहीलुट कार्यक्रम किया और पुरे गांव में प्रसादी वितरण कराया गया।
सचमुच में यह एक अच्छा पहल है और अन्य गांवों के लिये एक अच्छा संदेश भी है, आज डिजीटल के जमाने में लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे है , कुछ दिनों के बाद भाई चारा भी देखने को नही मिलेगा लेकिन परिस्थितियों में भी सरेकेल के युवा सांथी अपने बुजुर्गों की अमानत को संजोये रखा है।
मनोज कुमार निषाद ने बताया कि युवा साथी जागरूप हो चुके है, यहां के जो कला है उस विरासत को संजोये रखने का भरसक प्रयास करेंगे। कृष्ण जन्माष्टमी में गांव के सभी वर्ग के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया है जिसके लिये पुरे ग्रामवासियों को हृदय से आभार प्रकट करता हुं!
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अमृत लाल पटेल, मोहन ध्रूव, सरपंच पति भूवन साहु, मनोज निषाद, मुकेश साहु, रूपचंद पटेल,भोजराम ध्रूव, गोपाल साहु, तोषराम यादव,दिलीप साहु, साहु,दिनेश साहु,मोहरदास वैष्णव,कौशल बघेल, शिवकुमार बघेल,मुनु पटेल, कोंदा (रमरतन)साहु आदि लोगों नें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।