बलौदाबाजार वन मंडल में फर्जी कर्मचारी को मिला पनाह, सहानुभूति से किया नियमितीकरण
रायपुर /छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिला वन मंडल बलौदाबाजार जो कि रायपुर जिला से पृथक होकर नया जिला बना हैं। पूर्व में रायपुर वन मंडल था जहां से 16 साल के नाबालिक का दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत बताकर नियमितीकरण हुआ है।
जिसके संबंध में छत्तीसगढ़ संचार क्रांति न्यूज ने लगातार प्रकाशन किया है,और शासन प्रशासन तक शिकायत भी किया गया है। बड़े ही रोचक कहानी है, कि आबिद खान पिता हिम्मत अहमद खान जो लाखागढ़ का निवासी है, जिन्हे 16 साल 01 माह की स्थिति में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य पर रखकर उन्हे वर्ष 1997 के पूर्व कार्यरत दैविक वेतनभोगी मानकर वर्ष 2008 में नियमितीकरण कर दिया! और वास्तविक में जो दैनिक वेतनभोगी 1997 के पूर्व थे, कई येसे है जो 1988 के पूर्व है वो आज भी नियमितीकरण से वंचित हैं।
जांचकर्ता आनंद कुदरिया अधीक्षक बारनवापारा ने येसे सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करते हुए अपराधी को बंचाने का प्रयास किया है, अधीक्षक कुदरिया ने बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अनुसार किशोर अवस्था में (14से 18 वर्ष की आयु) खतरनाक कार्यों को छोड़कर सामान्य कार्य परिवार के प्रमुख होने एवं परिवार में कोई अन्य सदस्य रोजगार युक्त न होने की स्थिति में इयअपने तथा परिवार के पालन पोषण हेतु सामान्य कार्य करने हेतु उल्लेखित किया गया है।
जिसके कारण उस फर्जी वन चौकीदार का मनोबल बढ़ गया है कि अब मेरा कोई बाल पाका नही कर सकता!
लेकिन मैं शासन प्रशासन का ध्यानाकृष्ठ कराना चाहुंगा कि यह अधिनियम केवल प्राइवेट सेक्टर या संस्थानों के लिये है! सरकारी विभागों के लिये तो शुरू से 18 वर्ष की आयु बंधन है फिर अधीक्षक आनंद कुदरिया जो एक प्रशासनिक अधिकारी है वह अपने कलम को फंसाकर जालसाज,कुटरचना करने वाले व्यक्ति को जीवनदान देने का प्रयास किया है! जो कि न्यायिक दृष्टिकोण से सरासर गलत है!
क्या इसके लिये अधीक्षक आनंद कुदरिया के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी या उसे बंचाने का प्रयास किया जायेगा।
शासन के प्रावधानों के अनुसार 18 वर्ष ही मान्य है सहानुभूति पूर्वक का कारण बताते हुए शासन के नितियों को दरकिनार कर लाभ नही पहुंचाया जा सकता है।

जबकी संचार क्रांति न्यूज के टीम ने उनके दाखिला खारिज सूचना के अधिकार में हासिल किया !
क्या जांचकर्ता अधिकारी ने यह देखा और पाया कि आबिद खान पिता हिम्मत अहमद खान ने दिनांक 15.07.1997 से बारनवापारा परिक्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया है। जब आबिद खान ने वर्ष 1997 में बारनवापारा परिक्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया है बताया है, लेकिन मैं अगवत कराना चाहुंगा कि दिनांक 05.07.1996 में कक्षा ग्यारहीं में दाखिल हुआ है, और वर्ष 1999 में बारहवी पास किया है वो भी रेगुलर पढा़ई किया है!
अब बारनवापारा और पिथौरा की दुरी लगभग 30 कि.मीटर है किसी भी हाल में कार्य करना संभव ही नही है, रेगुलर की पढाई और शासकीय विभागों में रेगुलर कमाई!
दोषि के बयानों के आधार पर जांच प्रतिवेदन तैयार करना जांचकर्ता अधिकारी के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है! बंचाने की भी हद होती है लेकिन जिस तरह से उसे बंचाने का प्रयास करते हुए जांच प्रतिवेदन सौंपा गया है उस जांचकर्ता अधिकारी के खिलाफ भी एफआईआर प्रकरण दर्ज होना चाहिए!
मेरे द्वारा लगातार शिकायत किया जा रहा है लेकिन इस प्रकार के जांच प्रतिवेदन को आधार मानते हुए आबिद खान वन चौकीदार को बंचाने का प्रयास किया गया है, जिसके लिये माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर होगा जिसमें पार्टी,आबिद खान वन चौकीदार, वन मंडलाधिकारी बलौदाबाजार, अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य बारनवापारा होगा।
अब आंधी रूकने वाला नही है।

