कुंए में गिरे तीनों हाथियों को निकाला सुरक्षित , वन विभाग ने पटवा दिये किसान के कुएं
रायपुर / बलौदाबाजार जिला के बारनवापारा अभ्यारण्य के ग्राम हरदी में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब हांथी किसान के खेत में बने कुएं में गिर गए। रात्रि में ही हांथी की दहाड़ सुनाई दे रहा था लेकिन कोई गस्ती दल या गज वाहन, ट्रेकर नही पहुंच पाया।
सुबह खेत पहुंचने पर किसान टिकनेस ध्रुव ने जब यह दृश्य देखा तो घबरा गया और तत्काल गांव वालों को सूचना दी,और ग्रामीणों ने संचार क्रांति न्यूज से संपर्क किया। जब सुबह हांथी का फोटो देखा गया और कुछ ग्रामीणों के द्वारा बताये जाने के आधार पर चार हाथियों की गिरने की आशंका है।

जानकारी मिलते ही बया चौकी प्रभारी अश्वनी पड़वार अपनी पुलिस महकमें के साथ मौके पर पहुंचे, उन्होंने ग्रामीणों को शांत कराया और वन विभाग को सूचना दी। थोड़ी देर में वन विभाग की टीम भी पहुंची और अश्वनी पड़वार की निगरानी में रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया!
करीब चार घंटे की मेहनत के बाद दो बच्चे और एक वयस्क हाथी को कुएं से सकुशल बाहर निकाला गया। किन्तु एक शावक हांथी का पता नही चल पाया जो संदेह जनक है?

रेस्क्यू के दौरान चौकी प्रभारी अश्वनी पड़वार और उनकी पुरे महकमें मौजूद रहे।
मौके पर वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। सभी हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेज दिया गया। गौरतलब है कि 25 अक्टूबर को इसी हरदी ग्राम के एक ग्रामीण का हाथी के हमले से उनकी मौत हो चुकी थी, लेकिन उस समय न पुलिस की टीम पहुंची न वन विभाग की टीम पहुंची।
बल्की आक्रामक छुटभैय्या नेता पहुंचा जो कभी कांग्रेसी बन जाते है तो कभी भाजपाई,लोग आज तक उस अवसर वादी व्यक्ति को समझ नही पाये,वही व्यक्ति वन विभाग के छोटे कर्मचारी के सांथ मारपीट किया है!और विभाग के आलाधिकारी उनका मुह ताकते रह गये, विभाग के कर्मचारी के सांथ मारपीट करने वाले के विरूद्ध कुछ भी नही कर पाया!
हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
हालांकि, इस घटना में वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद पूरी मेहनत की तीनों हाथियों की जान बचाई,लेकिन जिस प्रकार से कुछ लोगों का कहना है कि हांथी चार थे अब समझ नही आ रहा है कि चौथे हांथी कहां है।

पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया की हर स्थिति में पुलिस उनके साथ खड़ी है, परंतु जो पूर्व में घटना घटित हुआ है, उस पर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़ा करता है कि रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे पिड़ीत बैरियर चौकीदार का आवेदन स्वीकार कर क्यों एफआईआर नही किया?
मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग ने संबंधित किसान के कुंए को पटवा दिया गया है, क्या चौथे हांथी पता लगाने का प्रयास किया गया? कहीं शावक डुबकर तो नही मर गया यह संदेह का विषय है।
कुंए की पटाई होने के बाद नन्हे हांथी पुन: पहुंचे थे स्थल पर, उनके पहुंचने का कारण क्या है कहीं खोज पर तो नही?
वन विभाग के द्वारा पाटे गये कुए का मुआवजा क्या किसान को देगा, पाटने से पहले क्या किसान से अनुमती लिया गया था, उस कुए का क्या आंकलन किया गया है।
ग्रामिणों में लगातार आक्रोश है।
ठोकारी परिक्षेत्र मे स्थापित भैंसाबांड़ा में मंचाया तबाही, भैंसाबाड़ा का ताबड़तोड़ किया है तुड़ाई,

कहीं न कहीं जंगल का अधोपतन भी यह एक कारण है, शासन बांट रही है वनाधिकार पट्टा, पट्टे के चाह में लोग काट रहे है जंगल और जानवर भांग रहे है गांवों की ओर जिससे हो रही है जनहानी!
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