सोनाखान परिक्षेत्र में वन भूमि पर अवैध निर्माण कार्य,वन रक्षक पर संरक्षण का आरोप तत्कालीन डीएफओ से भी की गई थी शिकायत जांच की कार्यवाही नगन्य
रायपुर / बलौदाबाजार वन मंडल के धाराशिव अस्थायी रोपणी के वन भूमि पर सारे नियमों को ताक में रखकर कुछ लोगों द्वारा भवन निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसकी शिकायत वन मंडलाधिकारी बलौदा बाजार से किया गया था किन्तु इस निर्माण को लेकर विभाग के ही एक वन रक्षक पर अवैध निर्माण कर्ताओं को संरक्षण जैसा प्रतित हो रहा है। पूर्व में भी इस वन रक्षक की शिकायत तत्कालीन डीएफओ एवं वन मंत्री से भी किया गया था, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरा मामला धाराशिव अस्थाई रोपणी क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण का है। ग्रामीण लोगों ने बताया की इस अवैध गतिविधि को संरक्षण देने का कार्य वनरक्षक के द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वन रक्षक ने धाराशिव जंगल में कार्यरत एक चपरासी के रिश्तेदारों को वन भूमि पर पक्के मकान निर्माण की अनुमति दिया है। जबकि इस हेतु वन विभाग या प्रशासन से कोई अनुमति भी नहीं लिया गया है। इसके बावजूद किसी भी प्रकार की कानूनी या विभागीय कार्रवाई नहीं की जा रही है!

वनरक्षक ने धाराशिव क्षेत्र में खुल रहे नये धान खरीदी केंद्र को भूमि देने का विरोध किया था, परिणामस्वरूप बीते दो वर्षों से किसानों के लिए अत्यंत जरूरी इस केंद्र के निर्माण कार्य जैसे कार्यालय भवन, चबूतरा, शेड, अहाता आदि लंबित पड़े हुए हैं।
वहीं वर्तमान में इसी भूमि पर निजी पक्के मकान बनाया जा रहा हैं , इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने वन मंत्री से शिकायत भी किया था वन मंत्री केदार कश्यप को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था। जिसमें वनरक्षक पर रिश्वत लेकर वन भूमि पर मकान बनाने की अनुमति देना, विभागीय चपरासी के रिश्तेदारों को प्राथमिकता देना, शासकीय कार्यों में अड़ंगा लगाना, पद का दुरुपयोग कर मनमानी और दबावपूर्वक कार्य कराना, वन भूमि की रक्षा करने की जिम्मेदारी को
व्यक्तिगत लाभ के लिए दरकिनार करना आदि मामला है।
शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की ओर से एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर प्रकरण शौप दिया गया! जांच के दौरान ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि भी हुई थी! जांच उपरांत तत्कालीन उप वन मंडल अधिकारी बलौदा बाजार गोविंद सिंह ने जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर संबंधित वन रक्षक को नोटिस भी भेजा था किन्तु आज तक कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है! ग्रामीणों ने संबंधित वनरक्षक को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कार्यवाही करते हुए तत्काल प्रभाव से
निलंबित करने का मांग किया है,और अवैध निर्माण को तुरंत रोकने और उसे ध्वस्त करने का भी मांग किया है।
किन्तु वन मंडलाधिकारी बलौदाबाजार की जांच कार्यवाही संदेह के दायरें मे है, क्योंकि उक्त प्रकरण की जांच आज तक पूर्ण नही हुआ है और ना हि दोषी के उपर कार्यवाही किया गया है।
जंगल के रक्षक ही जब भक्षक बन जाये तो , विभाग का पतन निश्चित है।

