छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ वन धन भवन में चल रहा है कमिशन का गोरखधंधा,
सचिव किरण गुप्ता की मनमानी ने लघु वनोपज संघ को कर दिया है खोखला
रायपुर / छत्तीसगढ़ के वन विभाग में इन दिनों लगातार हलचल जारी है,इसी बीच में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ वन धन भवन की बड़ी कारनामा खुलकर सबके सामने आया है।
दरअसल मामला यह है कि संघ मुख्यालय में पदस्थ कर्मचारी नारायण दत्त सहायक ग्रेड 03 ने लिखित रूप से मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, अपर मुख्य सचिव महोदया, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर वन धन भवन में चल रहे गोरखधंधा के बारे में पोल खोल दिया है।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ में सहकारिता विभाग से आई महिला का ताना बाना सुनकर आप सब दंग रह जायेंगे। और यह महिला कोई नही बल्की सचिव पद पर पदस्थ किरण गुप्ता है, जो कि शिकायतकर्ता के आवेदन में स्पष्ट रूप से लेख है!रिश्वत ना देने पर सचिव महोदया व अन्यके द्वारा की जा रही प्रशासनिक मनमानी के विरुद्ध शिकायत पत्र प्रेषित किया गया है।
(1) दिनांक 15/10/2024 से दिनांक 31/07/2025 तक विभिन्न तिथियों में मेरे द्वारा प्रस्तुत कुल 16 चिकित्सा देयक ।
(2) वाहन भत्ता प्रदाय हेतु मेरे द्वारा प्रस्तुत आवेदन दिनांक 11.09.2024 एवं 15.02.2025
( 3) कार्यालयीन पत्र क्रमांक/MFP01/स्था./2025/11369 दिनांक 30.10.2025 के संबंध में लेख किया गया है।
नारायण दत्त सहायक ग्रेड 03 ने संदर्भ (1) के माध्यम से लेख किया है कि मेरे द्वारा कार्यालय-छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, अटलनगर नवा रायपुर के नियमानुसार चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु दिनांक’ 15/10/2024 से दिनांक 31/07/2025 तक विभिन्न तिथियों में चिकित्सा देयक तथा संदर्भित पत्र 02 के माध्यम से वाहन भत्ता प्रदाय करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। जिनको 01 वर्ष से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी आज दिनांक तक भुगतान लंबित रखा गया है।
महोदय, लेख है कि कार्यालयीन पत्र के माध्यम की कुछ चिकित्सा देयकों में अनावश्यक आपत्ति कर मुलतः वापस किया गया था। जिनके आपत्तियों का निराकरण कर पुनः भुगतान हेतु चिकित्सा देयक प्रस्तुत किया जा चुका है तथा किए गये आपत्तियों के संबंध में सक्षम चिकित्सा बोर्ड/प्राधिकारी द्वारा जारी दस्तावेज पाये जाने पर आज दिनांक तक प्रदाय नहीं किया गया है।
महोदय, अवगत् कराना चाहूंगा कि कार्यालय के अन्य अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा माह-अक्टूबर-2025 में प्रस्तुत चिकित्सा देयकों का भुगतान किया जा चुका है जबकि मेरे द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक चिकित्सा देयकों को लगभग 01 वर्ष से अधिक समय गुजर जाने पर भी बिना कारण बताए मनमानी करते हुए लंबित रखा गया है।
महोदय लेख है कि लंबित चिकित्सा देयकों के संबंध में जब जिम्मेदार कर्मचारी चिकित्सा शाखा प्रभारी कनिष्ठ लेखापाल श्री शैलेन्द्र बघेल से संपर्क किया गया तो उनके द्वारा मौखिक रूप से 10 प्रतिशत की रिश्वत् मांगी जा रही है। रिश्वत् की रकम न देने पर उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को भ्रमित कर भुगतान को रोका जा रहा है जिन्हे सचिव महोदया सुश्री किरण गुप्ता जी का भी संरक्षण प्राप्त है ।

महोदय शिकायत है कि श्री बघेल शासन के नियमों के विरूध्द पिछले 18 वर्षों से भी अधिक समय से संघ में एक ही पद तथा एक ही जगह (लंबे समय से स्थापना शाखा) में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं जिसके कारण उनके द्वारा बुलंद हौसले से रिश्वत् की मांग
की जा रही है तथा रिश्वत् देने से मना करने पर इस प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है जिनको सचिव महोदया सुश्री गुप्ता का आश्रय प्राप्त है।

महोदय पुनः लेख है कि वर्तमान में सचिव महोदया द्वारा अपने प्रशासनिक शक्तियों का दुरूपयोग कर संदर्भित पत्र 03 के माध्यम से कार्यालयीन कार्य पुलिस व्हेरिफिकेशन हेतु अस्तित्वहीन पते पर भेजे गये पत्र, डाक के माध्यम से वापस आ जाने पर मुझे जिम्मेदार मानते हुए सेवा समाप्ति की धमकी दी जा रही है और प्रशासनिक मनमानी पर आतुर हो गई है। महोदय उक्त तथ्यों की पुष्टि संलग्न दस्तावेजों एवं कार्यालयीन अभिलेखों से की जा सकती है।
महोदय निवेदन है कि उक्त के संबंध में कृपया अविलंब निष्पक्ष कार्यवाही कर लंबित चिकित्सा देयकों व वाहन भत्ता को भुगतान कराते हुए नियम विरूध्द तरीके से पिछले 18 वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर एक ही पद तथा एक ही जगह पर पदस्थ कनिष्ठ लेखापाल श्री शैलेन्द्र बघेल को उनके मूल विभाग में भेजने अथवा संघ मुख्यालय से दूर अन्य जगह में पदस्थ करने का कष्ट करेंगे। जिससे शासन प्रशासन के सुशासन नीति अनुरूप प्रशासनिक कार्यप्रणाली सुचारू रूप से बनी रहें तथा भ्रष्ट कर्मचारी के बुलंद हौसले पर कुठाराघात लग सके । आशा है शासन की स्वच्छ छवि बनाऐ रखने हेतु इस शिकायती पत्र पर अविलंब कार्यवाही करेंगे।


छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ वन धन भवन में वन विभाग से सेवानिवृत हुए अधीक्षक बी.जी.बंग को प्रशासन का कमान सौपे हुए है, जिसके कारण वन धन भवन अब अस्तित्व हीन लगने लगा है। एक सहकारिता विभाग से आई महिला कर्मचारी संघ आफिस को वन विभाग से पृथक रख दिये है, वही वन विभाग से सेवानिवृत होकर आये कर्मचारी अपने ताने बाने और कुसल नितीगत दमनकारी नीति से लुटिया डुबोने के लिए लगे हुए हैं, इस सभी लोगों से तंग आ चुके है राज्य लघु वनोपज संघ के अधिकारी, कर्मचारी, छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ जो है जितने भी सेवानिवृत अधिकारी कर्मचारी है उनके पालना घर बन चुका है।


