छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ कार्यालय में पदस्थ सचिव किरण गुप्ता के खिलाफ कर्मचारी संगठन ने खोला मोर्चा
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ वन धन कार्यालय में पदस्थ सचिव की मनमानी ने तेन्दुपत्ता लघु वनोपज संघ को कर दिया है खोखला, राज्य लघु वनोपज संघ के कर्मचारियो ने प्रताड़ित होकर श्रीमति किरण गुप्ता सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव ,वनमंत्री, अपर मुख्य सचिव, उप मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत किया है,पत्र में लेख किया गया है कि पिछले 06 वर्षों से भी अधिक समय से प्रति नियुक्ति पर पदस्थ संयुक्त आयुक्त एवं सचिव किरण गुप्ता द्वारा कर्मचारी/अधिकारियों के हितों के विरूद्ध की जा रही ताना शाहीपूर्ण प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगाते हुए तत्काल प्रतिनियुक्ति समाप्त किया जाये!
दरअसल मामला यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, वनधन भवन, सेक्टर-24, अटलनगर नवा रायपुर में पिछले 06 वर्षों से भी अधिक समय से सहकारिता विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आकर पदस्थ संयुक्त आयुक्त एवं सचिव किरण गुप्ता द्वारा लगातार तानाशाही पूर्ण प्रशासनिक मनमानी की जा रही है जिससे अधीनस्थ कार्यरत् कर्मचारी/अधिकारियों में भारी असंतोष व्याप्त व आक्रोश व्याप्त है।
उनके द्वारा लगातार अपने प्रशासनिक शक्तियों का दुरूपयोग करते हुए कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रताड़ित करने की कार्यवाही की जा रही है !
उनके द्वारा तानाशाही राज चलाते हुए कर्मचारियों एवं अधिकारियों को आर्थिक क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से सस्पेंड/बर्खास्त तथा दूरस्थ अंचलों में स्थानानांतरण व तत्काल भारमुक्त करने की धमकी दी जाती है! मानसिक रूप से प्रताड़ित की जा रही है जिसका प्रभाव कर्मचारियों के मनोदशा, कार्यक्षमता एवं पारिवारिक परिस्थितियों पर पड़ रही है।
हाल ही में कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान में हुए 03 दिवसीय प्रांतव्यापी आंदोलन के दौरान उनके द्वारा दमनात्मक कार्यवाही करते हुए पदाधिकारियों का स्थानानांतरण एवं हड़ताल अवधि का वेतन रोके जाने की मनमाना पूर्ण कार्यवाही की गई है जबकि शासन से वेतन रोके जाने के संबंध में कोई भी आदेश व निर्देश अब तक जारी नहीं हुआ है ।
उनके द्वारा कार्यालय में कार्यरत नियमित कर्मचारियों को पद के विपरीत कार्य सौंपकर व पदोन्नति रोककर मूल कार्यों हेतु सेवानिवृत्त हुए चहेते अधिकारी कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने की छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ वन भवन में कुप्रथा प्रारंभ कर दी गई है जिसका संगठन घोर निंदा करता है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना करते हुए कर्मचारियों के उपादान की राशि को जानबुझकर आर्थिक क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से रोक दी गई है साथ ही उच्चाधिकारियों को भ्रमित करते हुए संघ कार्यालय को शासन के निर्देशों से परे घोषित कर दी गई है। लघु वनोपज संघ को सहकारिता विभाग है, हमें वन विभाग से कोई लेना देना नही है, हम वन मंत्री के निर्देशों को पालन करने के लिए बाध्य नही हैं कहते हैं।
शासन के निर्देशों की खुली अवहेलना करते हुए उनके द्वारा कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मनमाना संविदा नियुक्ति देकर शासन/लघु वनोपज संघ को प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये का आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है। जिससे शासन व लघुवनोपज संघ की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है ।

विगत कई वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मियों को अनैतिक संरक्षण प्रदान कर संघ को लगातार आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है, जिससे संघ की साख खराब हो रही है। संयुक्त आयुक्त एवं सचिव किरण गुप्ता की उक्त कृत्यों पर लघुवनोपज कर्मचारी कल्याण संघ घोर निंदा करता है साथ ही अनुरोध है कि उक्त विषय पर त्वरित संज्ञान लेकर 06 वर्ष से भी अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अधिकारी किरण गुप्ता (संयुक्त आयुक्त एवं सचिव) को तत्काल प्रभाव से प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से हटाया जाये ताकी का कार्यरत कर्मचारी स्वच्छ माहौल में अपनी सेवाएं दे सके ।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ कार्यालय में जब से वर्तमान प्रबंध संचालक पदस्थ हुए है तब, मनमानी गालीगलौच और तानाशाही राज चालु हो गया है। उक्त विषय पर यदि त्वरित संज्ञान लेकर कार्यवाही नहीं की गई तो कार्यरत कर्मचारी -अधिकारी पुरजोर विरोध हेतु बाध्य रहेगा जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन प्रशासन की होगी ।
वन धन भवन में अध्यक्ष,उपाध्यक्ष बैठाकर रखने से कोई मतलब नही है:-
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ में चेयरमैन और उपाध्यक्ष बनाकर बैठाने से कोई मतलब ही नही हो रहा है , उनके पदस्थिति होने के बाद कसावट आनी चाहिए था लेकिन ,उसके विपरीत हो रहा है। चैयरमेन और उपाध्यक्ष का कोई रोल नही है तेन्दुपत्ता में येसा लगता है, जो कि एक सहकारिता विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आये कर्मचारी को हटाने में पशिना छुट रहा है।
परिवारिक विवादों में घिरे रहने के कारण , परिवारिक विवाद के गुस्सा को वन धन भवन में पदस्थ कर्मचारियो के उपर उतारने का काम करती है सचिव,जो कि सरासर गलत है। समस्त जिला यूनियनों में उप प्रबंध संचालक के खुर्शी पर सेवानिवृत्त एसडीओ लोगों को बैठाकर रखें है,उन्हे पेंशन भी मिल रहा है,और संविदा के रूप में वेतन भी शासकीय आवास,शासकीय वाहन, भत्ता सभी ले रहे हैं और धन्य है येसे अधिकारी कर्मचारी जीवन भर झोली भरने का काम किया लेकिन पेट ही नही भरा जो डेलिविजेश की तरह सेवानिवृत होने के बाद भी काम करने के लिए मजबूर है!
स्थिति अब येसा हो गया है कि या तो वन धन भवन में सचिव किरण गुप्ता काम करेगी या फिर स्टाप के कर्मचारी लोग काम करेंगे।

