छ.ग.राज्य वन विकास निगम के कोडार काष्ठागार डिपों में 2431 नग सागौन की लट्ठा की घपलत बाजी
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के अधिनस्थ बारनवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत कोडार काष्ठागार डिपों संचालित हो रहा है इसके पूर्व यह डिपों बिरकोनी में संचालित होता था! कोडार काष्टागार डिपों में रिपोर्ट के अनुसार लगभग करोड़ो रूपया का सागौन घपला सामने आया है! कोडार काष्ठागार डिपों में विगत कई वर्षों से लकड़ी की हेराफेरी चल रहा था, जिसकी कमीशन नीचे से लेकर उच्च स्तर तक पहुंच रहा था !
येसा कहा जा सकता है कि प्रबंध संचालक और मंडल प्रबंधक की चुप्पी है,उससे येसा संदेह होता है कि उक्त कमीशन का बंटवारा वहां तक भी पहुंचता रहा होगा।
जब से बिरकोनी डिपो और कोडार काष्ठागार डिपों खुला है तब से एक एक रिकार्ड का जांच किया जाना चाहिए
बारनवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत जब से बिरकोनी डिपों,कोडार डिपो संचालित हुआ है तब से, जंगल से आये ईमारती,लट्ठा, जलाऊ लकड़ी की एक एक चालान की कापी की जांच तथा उक्त अवधि में जितने मनी रसिद, टीपी (अनुग्या पत्र) कटा है एवं मासिक आमद निर्वतन की रिपोर्ट की सुक्ष्म रूप सें जांच किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के बिरकोनी डिपों और कोडार काष्ठागार डिपों के बारे ग्रेडर जनक लाल साहु ज्यादा बेहतरीन तरीका से बता सकता है! जनक लाल साहु नामक ग्रेडर का लिखीत पत्र से पता चलता है जिसमें वन विकास निगम के अधिकारी कर्मचारियों ने कैसे वन विकास निगम को चुना लगाने के लिए 2431 नग सागौन लट्ठा को कहां किया गया है। क्योंकि इनके द्वारा मंडल प्रबंधक के नाम से पत्र लिखा हुआ है!·
पूर्व में प्रकाशन किया गया था किन्तु मंडल प्रबंधक और प्रबंध संचालक के कानों में जूं तक नही रेंगा, अधिकारी जिस प्रकार से चुप्पी साधी है उससे येसा प्रतित होता है कि वन विकास निगम के अधिकारी गलत है या फिर ग्रेडर गलत है जिनके कलम से जानकारी तैयार हुआ है जिन्होंने वन विकास निगम के करतुत को बताने का प्रयास किया गया था किन्तु अधिकारी उस समय नही सुनें!
यह सब जानकारी कार्यरत ग्रेडर के द्वारा मंडल प्रबंधक को लिखे पत्र से उजागर हुआ है! जिसमें सारे विवरण से मंडल प्रबंधक को अवगत कराया है , ग्रेडर ने लिखित रूप से यह भी बताया है कि सितंबर 2021 की स्थिति में काष्ठ की आमद, निर्वतन, और अंतर की जानकारी से सारे कर्मकांड का खुलासा होता है।
निलाम में प्रस्तावित रखा गया काष्ठ आमद से ज्यादा नीलाम में रखा गया था जिसमें 2431 नग 436.459 घन मीटर काष्ठ ज्यादा बढ़ोतरी हुआ है, इतनी मात्रा में काष्ठ बढ़ाेतरी कैसे हुआ है उक्त सागौन काष्ठ कहां से आया है, किसके कूप से आया है, किसने भेजा है और किस लिये भेजा है, किसके कहने पर भेजा है, उस समय आमद किसने लिया, किसने रिपोर्ट बनाया था जो इतने बड़े अंतर को विभाग के अधिकारियों को नही बताकर छुपाये रखा था, और उस लकड़ी को किसने बेंचा है वृहद जांच का विषय है!
किसने किया शासकीय दस्तावेजों को बाहर वायरल, किस लिये किया क्यों किया आश्चर्यजनक बाते इसके अलावा कोडार काष्ठागार डिपो का बड़ा कारनामा और सबके सामने खुलकर आता है, चालान क्रमांक 8382/04 दिनांक 01.09.2021 को POR मटेरियल चालान द्वारा डिपों में प्राप्त हुआ है, जिसका डिपों नंबर 78867 से 78874= 08 नग की जिसकी डिपों एलाट नंबर हुआ है लेकिन नीलाम में इस डिपों नं. की लट्ठा ही नही था।
माह मई 2021 से सितंबर तक के आमद में चालान में बल्ली को काष्ठ बना दिया गया है, अब बल्ली का काष्ठ बनना बड़ा गजब का खेला है, लेकिन नीलाम में उस डिपो नं. की काष्ठ नीलाम में नही है प्रत्येक चालान में 10 से 15 नग बल्ली को लट्टा बनाया है !अनुज्ञा पत्र में भी लट्टा बल्ली बेचते है उसे रास्ता में कुछ मत हो करके अनुज्ञा पत्र में जितना नग बेंचता है उसे किसी भी लाट में लिखकर नग बढ़ाकर घन मीटर को यथावत जारी कर दिया जाता है! क्या अधिकारी या कोई सरगना जो येसा दिमांक लगाने वाला है जो इस प्रकार के कार्य को अंजाम दिया है, येसे ही कार्य जब से डिपों खुला है तब से चला आ रहा होगा,न जाने कितने ट्रक सागौन माल को पार कर दिया गया होगा।
बड़ी बात ये है कि उस समय टीपी कौन काटता था, टीपी में राईटिंग, आमद कौन लेता था, मासिक रिपोर्ट कौन तैयार करता था यह जाांच का विषय है!
डिपों में कौन बाबु था लिपीक जिनके द्वारा जानकारी तैयार किया जाता था, जब वर्ष 2021-22 में इतनी भारी मात्रा में जंगल से रातों रात माल आ गया , तो न जाने वर्ष 2000 से 2023 तक इतने वर्षो में कितना माल खपा दिया होगा! मनी रसीद में भी वाहन चालक से नियमानुसार राशि की वसुली कि जाती थी किन्तु मनी रसीद में राशि बंचाकर कम राशि का उल्लेख कर दिया जाता था!
ग्रेडर के पत्र ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की सारी पोल खोलकर रख दिया है करोडों का घपला सबके सामने आया है ! न जाने जब से डिपों खुला है तब से कितना करोड़ो रूपया का सेंध लगा दिया गया होगा!
येसा प्रतित होता है कि आंखों के सामने ट्रको ट्रक सागौन का बेस किमती काष्ठ निकल गया होगा और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को इसकी भनक तक नही लगा! वर्तमान में प्रबंध संचालक है और मंडल प्रबंधक मामला को ठंडा बस्ता में डालने का प्रयास कर रहा है जिसके कारण लगातार प्रकाशन के बाद भी कार्यवाही नग्नय हैं , प्रबंध संचालक के कार्य प्रणाली पर संदेह होता है। कहीं येसा ना हो कि 2431 नग सागौन लट्टा को रिकार्ड में दुरूस्त कर सुधारने का प्रयास किया रहा हो, ताकी मामला को कफन दफन किया जा सके।



अगर जानकारी गलत था तो आज तक प्रबंध संचालक और मंडल प्रबंधक ने कार्यवाही क्यों नही किया, अगर जानकारी सहीं है तो 2431 नग 436.459 घ.मी.कैसे बढ़ गया है, इतने मात्रा में लकड़ी का पैसा किसके जेब में गया,
इतना भारी तादात में काष्ठ का आमद हो जाना और उसका बिक्री भी हो गंभीर जांच का विषय है!
ग्रेडर ने अपने पत्र में यह भी लेख किया है कि रात्री गस्त के समय POR मटेरीयल सागौन चिरान तथा 01 नग सायकल को चालान क्र. 8070/21 दिनांक 14.01.2022 के द्वारा काष्ठागार डिपों में भेजा गया था जबकी मटेरीयल सागौन चिरान को नीलाम दिनांक 08.01.2022 को नीलाम में प्रस्तावित कर दिया जिसका लाट क्र. 2075 स्टेक 5640 में 16 नग = 0.077 घन मीटर है!
जिस हिसाब से ग्रेडर का पत्र है छ.ग.राज्य वन विकास निगम को नंगा करके रख दिया है, 2431 नग लट्टा डिपों में आना और डिपों से रातो रात गायब हो जाना समझ से परे है।
क्या इसकी भरपाई (MD)प्रबंध संचालक करेंगें, या फिर (DM)बारनवापारा परियोजना के मंडल प्रबंधक करेंगें!
जिस प्रकार से 2431 नग लट्ठा 436.459 घन मीटर काष्ठ का अवैधानिक रूप आमद हुआ, और निर्वतन भी हुआ! इस आमद निर्वतन के पिछे लोडिंग अनलोडिंग का पैसा भी भुगतान किया गया होगा।
इस मामले में हेमाल लोगों की भी अहम भूमिका होगी क्योंकि लोडिंग अनलोडिंग हेमालों ने ही कि होगी, किस ठेकेदार को बेंचा गया, ठेकेदार को किसने सेट किया!
पूर्व में उप मंडल प्रबंधक चित्रा त्रिपाठी ने ग्रेडर के खिलाफ विडीयों फुटेज बनवाते हुए जांच की कार्यवाही की थी, जांच में क्या सही पाया और क्या गलत पाया सार्वजनिक नही किया है! कहीं मंडल प्रबंधक और उप मंडल प्रबंधक की सोंची समझी प्लान तो नही था, कि ग्रेडर को प्रताड़ित करने के लिए, या फिर ग्रेडर की ही गलती रहा था !
रेगुलर कर्मचारियों से प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त ग्रेडर अनाप शनाप व अमर्यादित गाली गलौच करता था जिसके कारण हेमाल से लेकर अधिकारी कर्मचारियों ने लिखीत रूप से प्रधान मंत्री से लेकर मुख्य मंत्री,वन मंत्री, प्रबंध संचालक को लिखित शिकायत किया गया था,लेकिन अधिकारी की क्या विवस्ता रही की जांच की कार्यवाही ही नही कर पाये है!

