जंगल सफारी में बस व जूं को टेंडर देकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य के सांथ किया जा रहा है खिलवाड़, टेंडर निरस्त नही हुआ तो होगा जंगी आंदोलन
रायपुर / छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में स्थित जंगल सफारी में बसों का मरम्मत ना करते हुए, निजी कम्पनी को टेंडर दिया जा रहा है जो कि उचित नही है जंगल सफारी को राजधानी के हृदय स्थल में स्थापित किया गया है,आज पुरे छत्तीसगढ़/भारत में पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है।
केन्द्र सरकार ने इसे किया फोकस……
जब प्रधान मंत्री जी जंगल सफारी आया तो श्रमिकों के हितों के रक्षा के लिये प्रतिबद्ध है, छत्तीसगढ़ को जंगल सफारी को रूप में एक नई पहचान मिली है जैसे कई अनेक बाते कही गई। आज राजधानी के हृदय स्थल में स्थापित जंगल सफारी में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य में ताला लगाने का काम किया जा रहा है, वाहन चालक,गाईड, सुरक्षा श्रमिकों का भविष्य असुरक्षित है।
छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष रामकुमार सिन्हा ने कहा कि जंगल सफारी में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के सांथ लगातार छलावा किया जा रहा है। जंगल सफारी में जो वर्तमान में चल रही बस है, व खराब बस है जो खड़ी है उनका मरम्मत नही किया जा रहा है और टेंडर के माध्यम से नई नई बसें मंगाने के फिराक में लगे है विभाग जो की गलत है!
विभाग के पास पर्याप्त बजट है पैसा है, पर्यटकों को समुचित सुविधाएं ही देना है तो विभाग क्यों नही रखिदता बस, जो बसें मरम्मत योग्य है उसे मरम्मत कराये और दो चार बस विभाग की ओर से खरिददारी करें। किन्तु येसा ना करते हुए निविदा के माध्यम से किसी निजी कंपनी या ठेकेदार को देना चाहती है जो कि कतई उचित नही है! जंगल सफारी में कार्य करने वाले वाहन चालक, गाईड व माली ,सुरक्षा श्रमिक लोगों के भविष्य के सांथ सीधा सीधा कुठाराघात है, क्या विभाग गारंटी लेगा कि निजी कंपनियों की बसें रहेगी लेकिन वाहन चालक, गाईड , सुरक्षा श्रमिक लोगों को विभाग से हि वेतन मिलेगा,क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी होगा।
संगठन इस प्रकार के क्रिया कलापों का विरोध करता है, 10 से 15 वर्षों तक काम कर चुके दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य के सांथ इस प्रकार के अमानवीय व्यवहार उचित नही है । आज जो जंगल सफारी में रौनक है, लोग जंगल सफारी को जो देखने आते है, जंगल सफारी में दिन रात पसीना बहाकर,जंगल सफारी को वास्तविक रूप से सफारी बनाया उनके परित्याग को एकाएक अनदेखा किया जा रहा है जिसका संगठन खुलकर विरोध करता है।
अगर टेंडर प्रक्रिया निरस्त नही होता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा जिसके लिए शासन प्रशासन और विभाग जिम्मेदार होंगे।

