बागबाहरा के करमापटपर में मंगल बिंझवार के द्वारा शासकीय जमीन को किया जा रहा था हड़पने का प्रयास, पैसो के लालच में पटवा दिया निस्तारी तालाब
रायपुर / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला में भूमाफिया सक्रीय हो चुके है, बागबाहरा तहसील के अंतर्गत लगातार भूमाफिया एवं दलालों के द्वारा जमीन की अवैध खरिदी बिक्री किया जा रहा है। बागबाहरा मंडी तालाब के पास खसरा नंबर 57/1 बसंत डबरी को पिथौरा निवासी लक्ष्मी नारायण अग्रवाल उर्फ फुन्नू सेठ के द्वारा पटवा दिया गया है। जिसकी शिकायत कलेक्टर से करने के बाद अनुविभागीय अधिकारी बागबाहरा के द्वारा तत्काल रोक लगा दिया था।

वैसा ही हाल करमापटपर मंगल बिंझवार के द्वारा किया जा रहा है, आपको बताना चाहेंगे कि बागबाहरा से तेन्दुकोना रोड़ के मध्य खल्लारी स्थापना है रोड के बगल में एक छोटा तालाब है, जहां पर करमापटपर के किसान अपनी निस्तारी करते आते है, उक्त तालाब में नहाने, किसान सिंचाई के साधन के रूप में उपयोग करते है, वन्यजीव पानी पिते है और गांवो के मावेसियों काे नहलाने व पानी पिलाने में उपयोग करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उस तालाब में शासन के द्वारा खुदाई व पिचिंग की कार्य भी कराया गया है, मंगल बिंझवार ने पटवारियों के सांथ सांठ गांठ करके कुटरचित ढंग से अपने नाम में रिकार्ड में दर्ज करा लिये होंगे वो अलग बात है। किन्तु यह तालाब शासकीय भूमि में बना है और शासन की ओर से खुदाई,गहरीकरण व पिचिंग कार्य किया गया है जिसे हम लोग जानते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरा निवासी के सक्रीय भूमाफिया जिनके विरूद्ध अनेको एफआईआर प्रकरण दर्ज है लक्ष्मीनाराय़ण अग्रवाल उर्फ फुन्नू सेठ जो कि जमीन दलाली में फेमस हो चुका है, उनके द्वारा लगातार बागबाबरा क्षेत्र के जमीनों में दखल दिया जा रहा है! उनका बस चले तो सारे नदी, तालाब, बांध को पटवा देगा और बेंच देंगा!खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में पैर पसार चुका है और उनके सांथ हमारे क्षेत्र के कुछ टुच पुंजिया दलाल लोग सामिल है जिन सबके विरूद्ध एफआईआर होना आवश्यक हो गया है।

करमापटपर निवासी मंगल बिंझवार एवं उनके शिक्षक पुत्र चमारराय बिंझवार ने पिथौरा निवासी फुन्नू सेठ से उक्त तालाब को 10 लाख रूपया में सौदा कर दिया है, जिसमें 04 लाख रूपया एडवांस भी ले लिया गया है जिसकी पुष्टी स्वयं मंगल बिंझवार ने किया है।

चमारराय बिंझवार शिक्षक
मंगल बिंझवार और फुन्नू सेठ के संयुक्त निगरानी में तालाब को पटवाया जा रहा है, वर्तमान में वहां पर भारी तादात में मुरूम मिट्टी डाल दिया गया है जो कि शासन के नियम विरूद्ध है।
निस्तारी तालाब (ग्रामीणों के दैनिक उपयोग का तालाब) को बेचना, पट्टे पर देना, या उसे पाटकर (मिट्टी भरकर) अवैध कब्जा करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तालाबों का स्वरूप बदलना प्रतिबंधित है!
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ऐसी गतिविधियों पर निम्नलिखित कार्यवाही होती है:-1. प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही (Administrative & Legal Action):-अतिक्रमण हटना और जुर्माना: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 242 और 253 के तहत, तालाब पाटने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
मूल स्वरूप में बहाली (Restoration):- प्रशासन द्वारा तालाब को अवैध कब्जे (दुकान, मकान) से मुक्त कराकर उसे वापस तालाब के रूप में लाने का आदेश दिया जाता है।
रजिस्ट्री/पट्टा रद्दीकरण: –यदि धोखे से तालाब का पट्टा या रजिस्ट्री करा ली गई है, तो उसे अवैध घोषित कर रद्द कर दिया जाता है।
जेसीबी/डंपर द्वारा कार्यवाही: –समय सीमा में कब्जा नहीं हटाने पर नगर निगम या प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण को जेसीबी से तोड़ा जा सकता है और मलबा हटवाया जा सकता है।
दंड/जेल:- जानबूझकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उस पर कब्जा करने के लिए संबंधित के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती हैहैं।
निस्तारी तालाब की सुरक्षा हेतु नियम:- सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, तालाब या जल निकायों को पाटा नहीं जा सकता, चाहे वह निजी जमीन के भीतर ही क्यों न हों।निस्तारी तालाब का उपयोग केवल गांव के निवासियों द्वारा निस्तारी (नहाना, मवेशी धोना, पानी लेना) के लिए ही किया जा सकता है।
क्या करें यदि तालाब को पाटा जा रहा है?
कलेक्टर/एसडीएम को शिकायत:- आप अपने जिले के कलेक्टर, एसडीएम (SDM), या तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL): –यदि स्थानीय प्रशासन कार्यवाही नहीं करता है, तो नागरिक मिलकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।
निस्तारी तालाब (निस्तार यानी दैनिक उपयोग के लिए सार्वजनिक जल स्रोत) को बेचना या उसे पाटना (फिल करना) एक गंभीर अपराध है। चूँकि निस्तारी तालाब सरकारी या सामुदायिक भूमि होती है, इसलिए इसे बेचने या पाटने के मामले में कानून जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन यदि दलित या किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जा या नुकसान किया जाता है, तो निम्नलिखित कानूनी कार्यवाही हो सकती है:-
मुख्य कानूनी धाराएं (Criminal and Revenue Actions)छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (CGLRC), 1959 की धारा 248: –अवैध रूप से सरकारी भूमि (तालाब सहित) पर कब्जा करने या उसे नुकसान पहुँचाने पर इस धारा के तहत बेदखली, जुर्माना और 6 महीने तक की जेल हो सकती है।
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) / भारतीय न्याय संहिता (BNS):धारा 420 (धोखाधड़ी): –यदि तालाब की जमीन को निजी बताकर बेचा जाता है।
धारा 447 (आपराधिक अतिचार): –तालाब की जमीन पर अवैध रूप से घुसने या कब्जा करने पर।
धारा 430/431 (सिंचाई/जल स्रोत को नुकसान):- सार्वजनिक उपयोग के पानी के स्रोत को नुकसान पहुँचाने पर।
कार्यवाही का स्वरूप तालाब की बहाली:- यदि तालाब पाटा गया है, तो प्रशासन उसे खाली करवाकर पुराना स्वरूप लौटाएगा।
संपत्ति की कुर्की: यदि जमीन बेची गई है, तो रजिस्ट्री अवैध मानी जाएगी और क्रेता-विक्रेता दोनों पर कार्यवाही होगी।
मंगल बिंझवार एवं उनके पुत्र चमारराय बिंझवार जो कि वर्तमान में शिक्षक है पिथौरा विकास खण्ड के बेलडीही के प्राशमिक शाला में पदस्थ है, जब एक शासकीय कर्मचारी होकर,शासकीय जमीनों को इस प्रकार के हड़पने का प्रयास करना तथा उनके संरक्षण में तालाब जैसे निस्तारी करने व उपयोगी तालाब को पैसो के लालच में पटवाया जा रहा है!
चमारराय बिंझवार के विरूद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 तथा 1966 के तहत कार्यवाही करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।
तथा मंगल बिंझवार के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर प्रकरण दर्ज कराया जाना चाहिए, और सक्रीय भूमाफिया फून्न सेठ के विरूद्ध भी एफआईआर प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री तथा राजस्व मंत्री उक्त मामले को गंभीरता से लेते भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर प्रकरण दर्ज कराते हुए कानूनी कार्यवाही किया जाना आवश्यक हो गया है ताकि किसी का हिम्मत ही ना हो सके की तालाब, डबरी जैसे निस्तारी के साधन को पाटकर,पटवाकर बेंच सकें।


