वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल लंबे समय से एक ही स्थान पर जमें हुए है, उप मंडल प्रबंधक चित्रा त्रिपाठी जिनके नांक के निचे, कई लाखों की मुरूम हो गई चोरी
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड बारनवापारा परियोजना मंडल अब अपने मूल स्वरूप में नही रह गया, लगातार वन विकास निगम के जंगलों में हो रहा है अतिक्रमण, हो रहा है अवैध पत्थर तोड़ाई, अवैध मुरूम खनन, शासन प्रशासन की कोई खौफ नही है!
यह सब उप मंडल प्रबंधक चित्रा त्रिपाठी की लंबे समय से एक ही स्थान पर जमें रहने के कारण को डर भय नही हैं, जिसके कारण लगातार वन विकास निगम में अवैध कार्य हो रहे है और अधिकारियों ने चुप्पी साध लिया है!
मुरूम खोदाई के मामला को लेकर जब संचार क्रांति न्यूज में लगातार प्रकाशन किया उसके बाद से हरकत में आई है वन विकास निगम अधिकारी, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए बस कार्यवाही की जा रही है, जबकी यहां पर डिप्टी रेंजर से लेकर रेंजर, उप मंडल प्रबंधक तक दोषी है ! क्योकि निरीक्षणकर्ता अधिकारी उप मंडल प्रबंधक होता है, जिस प्रकार मुरूम खुदाई,पत्थर तुड़ाई कार्य हुआ है उससे स्पष्ट होता है कि उप मंडल प्रबंधक निरिक्षण के लिए जाते ही नही है एसी की हवा ले रहे हैं जिसके कारण कर्मचारियो में कसावट नही है।
डिप्टी रेंजर टीकेलाला साहु को बचाने के लिए उप मंडल प्रबंधक लगे हुए है जबकी तो पूर्ण रूप से दोषी डिप्टी रेंजर है जिन्होने निरीक्षण व गस्त ही नही किया था जिसके कारण से एकाएक भारी तादाद में वन भूमि की खोदाई करके मुरूम चोरी कर ले गया है। उप मंडल प्रबंधक,रेंजर, डिप्टी रेंजर के नाक के निचे दम करते हुए चोर ले गया लाखो का मुरूम!

वन विकास निगम के कौआझर बीट में लगातार विनाश ही विनाश हो रहा है संरक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ती हो रहा है!

भारतीय वन अधिनियम 1927 की धाराओं जैसे धारा 26, धारा 33, धारा 80A के अंतर्गत एफआईआर और 15,000 रू से भी अधिक जुर्माना लगता है तथा जेसीबी,ट्रक, जब्त करने और 1-2 वर्ष तक जेल की सजा का प्रावधान भी है। किन्तु आज तक जेसीबी वालों को न पकड़ सका न कार्यवाही कर सका, सारे मुरूम पारागांव के पास बन रहे ओवरफ्लाई रोड़ पर जा रहा है ठेकेदार पर लगाम लगाना चाहिए था लेकिन कार्यवाही ही नही करना संदेह पैदा कर रहा है।
वन विकास निगम में उप मंडल प्रबंधक सबसे असफल दंडाधिकारी बनकर बैठे हुए है, जिसके अपने मूल पदिय दायित्वों का भान भी नही है, येसी क्या परिस्थिति आन पड़ी है जिसके कारण वन विकास निगम के अधिकारी से लेकर वन मंत्री भी डर रहे है, और लगातार पदस्थ किये हुए हैं।
स्थानांतरण नीतियों को चुनौती देकर पदस्थ है उप मंडल प्रबंधक चित्रा त्रिपाठी जिनके कार्यकाल में लगातार अवैध कार्य हो रहे है!
वन विभाग अवैध खनन रोकने के लिए तत्काल नोटिस जारी करता है और दंण्डनात्मक कार्यवाही करता है किन्तु वर्तमान में वन विकास निगम के द्वारा येसा नही किया गया है जिसके कारण वन विकास निगम के समस्त अधिकारी कर्मचारी संदेह के दायरें में है।
लेकिन जिस प्रकार से जमीन की खुदाई करके अवैध तरिका से मुरूम निकाल ली गई है उसकी भरपाई कौन करेगा, मंडल प्रबंधक या उप मंडल प्रबंधक या फिर रेंजर डिप्टी रेंजर, कहीं येसा तो नही की समन्वय के राह पर चलते हुए इतनी भारी तादाद में खुदाई के बाद भी धृतराष्ट्र जैसे स्थिति रह गई हो??

जब वनों का संरक्षण करने वाले ही जंगलों और वन भूमि को बेंचना चालु कर दें तो विनाश निश्चित है, चोरी,आग, वन्यप्राणियों के सुरक्षा सहित तमाम प्रकार के शपथ लेने वाले वर्दीधारी अपनी ईमान बेंच चुके है येसा संदेह होने लगा है।
जब सीजी संचार क्रांति न्यूज एवं संचार भारत न्यूज की टीम ने गुर्रूडीह क्षेत्र का दौरा किया तब नजारा देखने को मिला, ये वही भूमि था जहां से अतिक्रमण कारियों को खदेड़ा गया था।
लेकिन राजनीतिक धमक के आगे नतमस्तक हो चुके है छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी कर्मचारी ,जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो ना वन रहेगा न वन्यप्राणी, न जल रहेगा न जंगल और ना ही जमीन!
सीजी संचार क्रांति न्यूज की टीम ने जब प्रबंध संचालक से दुरभाष में चर्चा किया और वन कक्ष 816 के नजारा का विडीयों फोटो भेजकर चल रहे काली करतूत की पर्दाफास किया तब कहीं जाकर वन विकास निगम में हड़कंप मचा है।
शिकायत व प्रकाशन के बाद भी कोई कार्यवाही नही की जा रही है क्या छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक क्षेत्र रक्षक, डिप्टी रेंजर, रेंजर,उप मंडल प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करेगा या सह देगा यह देखना है।

