छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 की अनुठी पहल ,वन विभाग के दैनिक वेतन भोगियों के आश्रित पिड़ीत परिवार को मिलेगा एक लाख रूपया अनुकम्पा अनुदान
रायपुर/ छत्तीसगढ़ में वर्तमान में भिन्न भिन्न संगठन कार्य कर रहे है लेकिन वन विभाग में कार्यरत कर्मचारियों का कुछ अलग ही पहचान है, छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 लगातार दैनिक वेतनभोगी भोगी कर्मचारियों के हितों का मुद्दा उठाते आ रहे है!
छत्तीसगढ़ में पहला येसा निर्भिक संगठन देखने को मिला जो अपनी पक्का मजबुत इरादा के सांथ संघर्षरत है, वर्ष 2018 में लगातार 22 दिनों तक ,वर्ष 2022 में लगातार 34 दिनों तक, वही वर्ष 2024 में 48 दिनों तक लगातार अनिश्चित कालीन हड़ताल में रहकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, वाहन चालक,कम्प्युटर आपरेटर, डाटा एन्ट्री आपरेटर, कार्यालय सहायक, तेन्दुपत्ता गोदाम सुरक्षा श्रमिको के लिए मुद्दा उठाया!
वर्ष 2018 अनिश्चित कालीन हड़ताल में सफलता :- छत्तीसगढ़ में वर्ष 2008 में नियमितीकरण के बाद किसी भी विभाग में दैनिक वेतन भोगी नही माना जाता था और ना हि दैनिक श्रमिक शासन को विभाग के द्वारा निरंक भेजा जाता था,किन्तु छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने इस मुद्दा को लेकर रणनीति के तहत लड़ाई लड़कर दैनिक वेतनभोगी मनवाते हुए पहली बार वृत्त स्तर से वरीयता सूची बनवाया!
वर्ष 2022 की अनिश्चित कालीन हड़ताल की सफलता :- संगठन ने पुन : छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 के बैनर तले वर्ष 2022 में 34 दिनों तक अनिश्चित कालीन हड़ताल किया जिसके परिणाम स्वरूप निम्न मांगे पुरी हुई!
1. उक्त हड़ताल के परिणाम स्वरूप श्रमायुक्त दर पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कुशल,अरिधकुशल, अकुशल श्रमिकों को 4,000 रूपया श्रम सम्मान राशि पारितोषिक भुगतान!
2. दैनिक वेतन भोगी के निधन हो जाने पर उनके आश्रित पिड़ीत परिवार के सदस्य को एकमुस्त 01 लाख रूपया अनुकम्पा अनुदान राशि, का भुगतान!
3. हड़ताली दैनिक वेतन भोगियों को 34 दिन हड़ताल अवधी का वेतन भुगतान आदेश जारी!
4. हड़ताली कर्मचारियों के पुन: वापसी सेवामुक्त किये गये की बहाली!
5. दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण की प्रस्ताव शासन को भेजा गया!
वर्ष 2024 की अनिश्चित कालीन हड़ताल की परिणाम :- छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पुन: मैदान में कुदा जिसके परिणाम स्वरूप निम्न मांगे पुरी की गई :-
1. वन विभाग में कुछ कुछ वन मंडलों में 24 घंटा ड्युटी लिया जा रहा था जिसे तत्काल बंद कर शासन के नियमानुसार 08 घंटा ड्युटी लिये जाने का निर्देश जारी हुआ!
2. दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों जिनकी सेवा अवधि 02 वर्ष पूर्ण हो गया है उनका स्थायीकरण करने हेतु प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
3. कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम लागु किये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
4. वन विभाग में 129 दैनिक वेतनभोगी को कार्य से पृथक किया गया उनकी पुन: वापसी !
5. श्रम सम्मान राशि से वंचितों को श्रम सम्मान देने के लिए जारी हुए निर्देश!
6. हड़ताली कर्मचारियों को हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान!
सहित कई येसे मुद्दे है जिन्हे सकरात्मक पहल से अधिकारियों से समन्वय बनाकर सफलता हासिल किया गया है।
संगठन के महामंत्री राजकुमार चौहान ने बताया की
वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एवं श्रमिक अपने संगठन के प्रति समर्पित है जिसके कारण संगठन मजबुती के सांथ अपना पक्ष रखता है और पहल भी होता है। कुछ फिरका पिरस्ती लोग स्वयं तो दिशा से भटक गये है और दुसरों को भटकाने का प्रयास कर रहे है, और नये नये संघ का आईना दिखा रहे है, लेकिन वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भटकने वाले नही है। पंजीयन क्रमांक 548 में थे, हैं और रहेंगे भी, जितने लोगों को संगठन से निकाला गया है वहीं लोग अपनी रोटी सेंकने के लिए नया संघ बनाया है जिससे सभी सदस्य सावधान रहें।

