नियमितीकरण ,स्थायीकरण कार्यभारित, 04 कोड श्रम कानून लागु करने सहित के अन्य मांगों को लेेकर 01 मई मजदुर दिवस के होगा जबरदस्त घेराव
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य में समस्त विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारी, जिसमें दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, दैनिक श्रमिक, संविदा, प्लेसमेंट, ठेका, कलेक्टर दर आदि के लाखों कर्मचारी निरंतर अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, दो महिना तीन महिना अनिश्चित कालीन हड़ताल किये हैं।
छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फैडरेशन के प्रदेश संयोजक एवं छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष रामकुमार सिन्हा ने बताया कि जब दोनों पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए सत्तासीन सरकार का पुर जोर विरोध किया और हमारी पार्टी सत्ता में आयेगा तो नियमितिकरण किया जायेगा करके वादा किया था।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के तहत नियमितीकरण का वादा किया गया, भारतीय जनता पार्टी के तमाम पदाधिकारी व वर्तमान में पदस्थ मंत्रियों के सांथ घंटो घंटो चर्चा बैठक होने के बाद भी आज सत्तासीन होने के बाद सारे बातो को किनारा कर दिया गया जो कि अनियमित , दैनिक वेतन भोगी, दैनिक श्रमिक, संविदा, स्कुल सफाई कर्मचारियों के हित में नही है!
छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ लगातार 48 दिनों तक अनिश्चित कालीन हड़ताल में रहे,वन मंत्री जी के द्वारा आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल स्थगन किया गया था लेकिन आश्वासन का दो साल बितने जा रहा है किन्तु आज तक दिये गये आश्वासन को पुरा नही कर पाये है जिससे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में काफी नराजगी है।

वन मंत्री जी वित्त मंत्री से मिलने के लिये कहते है और वित्त मंत्री अब आसानी से किसी से मिलते नही है!
पुरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में अब वित्त मंत्री के कार्यशैलियों को लेकर लगातार प्रश्न उठ रहे है, समस्त विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, दैनिक श्रमिक,कार्यालय सहायक, वाहन चालक, कम्प्युटर आपरेटर, डाटा एन्ट्री आपरेटर,सुरक्षा श्रमिक, स्कुल सफाई कर्मचारी एक जुट हो चुके है!
समस्त शासकीय विभाग/निगम/मंडल/बोर्ड के छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फैडरेशन के प्रदेश संयोजक रामकुमार सिन्हा ने कहा की देर से किया हुआ न्याय भी अन्याय के समान है इसलिये मुख्य मंत्री जी तथा वित्त मंत्री जी समय रहते दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के हितों में नियमितीकरण करने, स्थायीकरण करने, आकस्मिक्ता कार्यभारित करने संबंधित जल्द फैसला ले! स्कुल सफाई कर्मचारियों का भी अंशकालिन वेतन को पूर्णकालिन के रूप में परिवर्तित कर उनका भी भविष्य संवारने हेतु निर्णय लें।

वन विभाग :-
छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने लगातार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव जी से मुलाकात करके विवेदन किया ,उन्होने ने भी आश्वासन दिया था कि वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियो के लिए आकस्मिक्ता कार्यभारित लागु किया जा सकता है इसे बिल्कुल करायेंगे, मैं स्वयं वन मंत्री और वित्त मंत्री से बात करुंगा और आप लोगो के प्रस्ताव को पास करवाऊंगा बोला है लेकिन वह भी आज तक नही हो पाया है।
वन विभाग में जंगल सफारी में चल रहा है मनमानी ठेका के माध्यम से संचालित करने के मुड में है वन मंडलाधिकारी जंगल सफारी, लेकिन संगठन पुर जोर से विरोध में भीड़े हुए है,अगर जंगल सफारी के बस संचालन से लेकर अन्य कामों को टेंडर किया जाता है तो पुरे छत्तीसगढ़ के दैनिक वेतनभोगी सहित आस पास के ग्राम पंचायत के सरपंच,जनपद सदस्य, दिला पंचायत सदस्य सहित ग्रामीण बेमुद्दत हड़ताल में जायेंगे।
रायपुर वन मंडल के वन मंडलाधिकारी वित्त मंत्री के रिस्तेदार होने के कारण मनमानी पर उतर आये है, राजीव स्मृतिवन में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी को 4,000 रूपये श्रम सम्मान राशि का भुगतान नही किया जा रहा है। और आये दिन नये नये श्रमिक लगाये जा रहे है जिन्हे 4,000 रूपया श्रम सम्मान राशि का भुगतान कर रहे हैं,जिसके कारण रायपुर वन मंडलाधिकारी का पुर जोर विरोध हो रहा है,यह विरोध का मंजर रायगढ़ में दिखेगा।
मोदी की गारंटी पत्र को लेकर दैनिक वेतनभोगियों ने बहुत कुह कहा है कि लोकलुभावन वादा ने हमारा भविष्य चौंपट कर दिया है, न ही मोदी की गारंटी का पालन कर रहे है न ही उस दिशा में कार्य, संगठन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि वादाखिलाफी बंद कर किए गए वादे को और दिये गये आश्वासन को जल्द पुरा करें!
पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी को प्रदेश में लागू कर 35 प्रतिशत रिक्त शासकीय कार्यालय के पदों पर दैनिक वेतनभोगी, वाहन चालक, कार्यालय सहायक,कम्प्युटर आपरेटर, दैनिक श्रमिको तथा अनियमित कर्मचारियों को नियमित कर उनके अनुभव का लाभ लिया जाए।
अनियमित कर्मचारियों ने कहा- 100 दिन का वादा, सवा दो साल बीत गए कुछ भी किया सरकार
हाईकोर्ट के साफ टिप्पणी के बाद नई उम्मीद जागी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार संवैधानिक नियोक्ता है और गरीब कर्मचारियों के दम पर अपना बजट संतुलित नहीं कर सकती। जो लोग बुनियादी और महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को संभाल रहे हैं, उनके हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर चार महीने के भीतर निर्णय लेने के कठोर निर्देश जारी किए गए हैं। किन्तु सरकार की बेरूखी हाईकोर्ट के फैसले को मानने के लिए तैयार नही है जिसके कारण पुरे छत्तीसगढ़ में दैनिक वेतनभोगी व अनियमित कर्मचारियो आक्रोश व्याप्त है।
कई सालों से सेवा देने के बाद भी नियमित नही किये जाने के कारण सड़क पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी रोड़ पर उतरने के लिए मजबुर हो गया है।

भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के अनियमित एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ वादाखिलाफी पर उतर आई है। पुरे छत्तीसगढ़ में 33630 दैनिक वेतनभोगी कार्यरत है लेकिन वादा करके भी उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है।

