धरमजयगढ़ वन मंडल में विभागीय अधिकारी की लापरवाही खुलकर आया सामने, अनहोनी को अंजाम देने के लिये किया जा रहा था असुरक्षित परिवहन
रायपुर / छत्तीसगढ़ में नाम चिन्हा वन मंडल जो लगातार सुर्खियों में रहा है, लगातार लकड़ी के फर्जीवाड़ा को लेकर प्रकाशन होते रहा है, गोलमाल करने में धरमजयगढ़ वन मंडल फेमस हो चुका है ! यही धरमजयगढ़ है जहां काष्ठागार डिपों में 06 नग सागौन लट्टा का टीपी कटा था राह चलते टीपी में 08 नग हो गया,और लडक़ी का लट्ठा भी 08 नग हो गया।
धरमजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत कूपों की कटिंग एवं माइंस क्षेत्र में विस्तार को लेकर इन दिनों भारी मात्रा में पेड़ों की कटाई की जा रही है, लेकिन कटाई के बाद लकड़ियों को सुरक्षित तरीके से डिपो तक पहुंचाने में विभागीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आया है, जो कि किसी भी समय बड़े दुर्घटना को अंजाम दे सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हो रही कटिंन की लकड़ियों को खुले ट्रेलर वाहनों में बिना किसी उचित इंतजाम के ढुलाया जा रहा है, जिससे कभी भी राहगिरों को आफत में डाल सकता है।
उदाहरण के तौर वर्तमान के समय में देखने को मिला जब एक भारी वजनीय इमारती लकड़ी का गोला छाल से तरकेला मार्ग के बीच सड़क किनारे वाहन से खिसक कर गिर गया, उक्त वाहन की ट्राली खुला हुआ था जिसके कारण पकड़ का कोई उचित साधन न हो पाने के कारण चलती वाहन से गिर गया।

बसरते उस वक्त राहगीर नही चल रहे थे नही तो उसकी चपेट में आकर बड़ी दुर्घटना को अंजाम दिया जा सकता था, किसी भी प्रकार की जनहानी,पशुहानी नही हुआ है।
तरेकेला पुल के करीब सड़क किनारे पड़ा रहा लकड़ी का लट्ठा
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर लगातार इस तरह की लापरवाही देखी जा रही है, वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपने आप में मस्त रहते है जिसके कारण से इस प्रकार की घटना घटते जा रही हैं, जिसके कारण आमजन की सुरक्षा पर खतरा का साया मंडरा रहा है।
खुले ट्रेलर में बिना किसी रस्सी से बांधे लकड़ी लट्ठा को ले जाना न घोर लापरवाही को दरसाता है, यह राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
इस संबंध में जब धरमजयगढ़ उत्पादन इकाई शाखा के रेंजर जॉन तिग्गा से हमारे खोजी पत्रकार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया, शासकीय वाहन ट्रक के रहते हुए प्राइवेट ट्रक से कराया जा रहा है परिवहन!
वन मंडलाधिकारी इस मामले को कितना गंभीरता से लेता है अगर भविष्य में किसी भी प्रकार की घटना घटती है तो इसके लिए शासन प्रशासन व वन मंडलाधिकारी जिम्मेदार होंगे।

