वन विकास निगम के तुमगांव सर्कल के कौआझर बीट लगातार में हो रहा है पत्थरो की अवैध तोड़ाई और चोरी
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड में अब अधिकारी कर्मचारी की मनमानी निगम को बरबाद करके ही छोड़ेगा, पतन की ओर कदम बढ़ा चुकी है वन विकास निगम,आरंग रेंज में विगत कई वर्षों से पदस्थ कर्मचारी टीके लाल साहु जब क्षेत्र रक्षक थे तब से इनके हरकत वन विकास निगम को अपने चपेत में ले लिया है। चाहे अनाधिकृत से वृक्षों की कटाई का मामला हो, या अतिक्रमण का मामला हो, चाहे अवैध पत्थर तोड़ाई हो,पत्थर परिवहन हो या फिर अवैध मुरूम परिवहन का मामला हो!

उप मंडल प्रबंधक,मंडल प्रबंधक के संरक्षण में ही सारे वारदात हो रहे है, अगर अधिकारी अपने जिम्मेदारी में खरा उतरते तो जानकारी प्राप्त होते ही कठोर कार्यवाही करता किन्तु जानकारी प्राप्त होने के बावजूद भी सन्न खाकर चुप बैठे है उप मंडल प्रबंधक,मंडल प्रबंधक, यह बात हजम नही हो रहा है समझ से परे जैसा लग रहा है।

वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल के आरंग रेंज में जिस प्रकार से लगातार घटनायें घट रहे है उससे स्पष्ट होता है कि अधिकारियों की कोई लगाम ही नही है,जिसके कारण निचले स्तर के कर्मचारी दलालों के सांठ गांठ कर जमीन,पत्थर, मुरूम बेंच रहे है!

वन भूमि से अवैध रूप से पत्थर, बोल्डर या खनिज निकालना एक गंभीर वन अपराध (Forest Offence) है। इसके लिए भारतीय वन अधिनियम, 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act) के तहत सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाती है।
मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यवाही की जाती है:
वाहन और मशीनरी की जब्ती: अवैध उत्खनन में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, ट्रॉली, डंपर, जेसीबी, क्रेन और अन्य मशीनरी को वन विभाग द्वारा तुरंत जब्त कर लिया जाता है।
सख्त जुर्माना: एमएमडीआर अधिनियम संशोधन (2015) के तहत, अवैध खनन के लिए जुर्माना बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक किया जा सकता है।
कारावास (जेल): दोषियों को 5 वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है।
वन अपराध प्रकरण (FIR): वन विभाग द्वारा भारतीय वन अधिनियम की धारा 52 के तहत FIR दर्ज की जाती है और अपराधियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
क्षतिपूर्ति की वसूली: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए अवैध रूप से निकाले गए खनिजों के मूल्य के साथ-साथ पुनर्स्थापना (restoration) की लागत भी वसूल की जा सकती है।
अतिक्रमण बेदखली: यदि वन भूमि पर अवैध कब्जा करके खनन किया जा रहा है, तो धारा 80 ए (भारतीय वन अधिनियम) के तहत बेदखली का नोटिस जारी कर कब्जा हटाया जाता है।

लेकिन सारे प्रक्रियाओं में असफल नजर आ रहे है इसलिये तुमगांव सर्किल प्रभारी टीके लाल साहु को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965-66 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।
वन विका निगम में पैसों का बोल बाला है जिसके कारण कार्यवाही नही हो पाता है।

