बागबाहरा में लगातार भूमाफियाओं की सक्रीयता बढ़ती जा रही है, निस्तारी तालाबों को पटवाने का किया जा रहा है काम
रायपुर / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला में भूमाफिया सक्रीय हो चुके है, बागबाहरा तहसील के अंतर्गत लगातार भूमाफिया एवं दलालों के द्वारा जमीन की अवैध खरिदी बिक्री किया जा रहा है और निस्तारी करने के साधन तालाब,डबरी को पाटकर बेचने के फिराक में लगे हैं।
अवगत कराना चाहुंगा की बागबाहरा मंडी तालाब के पास खसरा नंबर 57/1 बसंत डबरी को पिथौरा निवासी लक्ष्मी नारायण अग्रवाल उर्फ फुन्नू सेठ के द्वारा पटवा दिया गया है। जिसकी शिकायत कलेक्टर से करने के बाद अनुविभागीय अधिकारी बागबाहरा के द्वारा तत्काल प्रभाव से स्टेय (रोक) लगा दिया गया है। रोक तो लगा दिया गया है किन्तु जेसीबी मशीन से जो पटवाने वाले के विरूद्ध कोई कार्यवाही नही किया गया है और ना ही उसको पुन: खुदवाई करवाया गया!जबकी आने वाले बरसात में पट जाने के कारण उक्त डबरी, तालाब में पानी का भराव नही होगा और आम जनता निस्तारी करने के लिए इधर उधर भटकेंगें!
शिकायत के बाद पटवारी ने मौके का निरीक्षण किया और आम जनता से पूछताछ कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया पंचनामा लिया, जहां पर पाया गया कि वास्तव में 50-60 वर्षों से निस्तारी तालाब, डबरी को पाट दिया गया है।

वर्तमान में पदस्थ तहसीलदार ,कार्यवाही करने के बजाय उसे बिक्री नामा के लिये ले रहा है रूची, येसा लगता है दलालों पेंच में फंस चुका है तहसीलदार, अगर पाटने वाले, और पटवाने वाले के विरूद्ध कार्यवाही नही होता है तो निश्चित रूप से तहसीलदार के विरूद्ध कार्यवाही होकर रहेगा। जिनके संज्ञान में आने के बाद भी चुप्पी साधे बैठी है। गुप्त सूत्रो से पता चला है कि तहसीलदार,नायब तहसीलदार, और तहसील आफिस में बैठे बाबु ज्यादा सक्रीय हो चुके है,रूची ले रहे है ताकी डबरी,तालाब जैसे तैसे बिक सके!
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरा के सक्रीय भूमाफिया जिनके विरूद्ध अनेको एफआईआर प्रकरण दर्ज है वही फुन्नू सेठ जो कि जमीन दलाली में फेमस हो चुका है, उनके द्वारा लगातार बागबाबरा क्षेत्र के जमीनों में दखल दिया जा रहा है, उनका बस चले तो सारे नदी, तालाब, बांध को पटवा देगा और बेंच देंगा!खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में पैर पसार चुका है और उनके सांथ हमारे क्षेत्र के कुछ टुच पुंजिया दलाल लोग सामिल है जिन सबके विरूद्ध एफआईआर होना आवश्यक हो गया है, बागबाहरा के माहौल को खराब करने के लिए फुन्नू सेठ दस्तक दे चुके है!
बागबाहरा मंडी तालाब के बगल में बसंत डबरी के नाम से छोटा तालाब है जिन्हे पिथौरा निवासी सक्रीय भूमाफिया के द्वारा पटवाया गया है।



वही कल्याणपुर और करमापटपर के बीच में खल्लारी स्थापना के पास रोड किनारे छोटा तालाब है जो पहले वन क्षेत्र में आता था वन्य प्राणियों के पानी पीने तथा खल्लारी स्थापना के जितने भी पुजा पाठ के सामाग्री, तथा जोत जवांरा विसर्जित करने के लिये तालाब बना हुआ है। जहां पर मावेसी भी पानी पिते है और जंगली जानवर भी पानी पिते है,उस तालाब पर भी फुन्न सेठ का नजर पढ़ गया है उस छोटे तालाब को पटवा रहा है, वहां पर भारी तादात में मुरूम मिट्टी डाल दिया गया है।




निस्तारी तालाब (ग्रामीणों के दैनिक उपयोग का तालाब) को बेचना, पट्टे पर देना, या उसे पाटकर (मिट्टी भरकर) अवैध कब्जा करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तालाबों का स्वरूप बदलना प्रतिबंधित है!
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ऐसी गतिविधियों पर निम्नलिखित कार्यवाही होती है:
1. प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही (Administrative & Legal Action): अतिक्रमण हटना और जुर्माना: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 242 और 253 के तहत, तालाब पाटने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
मूल स्वरूप में बहाली (Restoration): प्रशासन द्वारा तालाब को अवैध कब्जे (दुकान, मकान) से मुक्त कराकर उसे वापस तालाब के रूप में लाने का आदेश दिया जाता है।रजिस्ट्री/पट्टा रद्दीकरण: यदि धोखे से तालाब का पट्टा या रजिस्ट्री करा ली गई है, तो उसे अवैध घोषित कर रद्द कर दिया जाता है।
जेसीबी/डंपर द्वारा कार्यवाही: समय सीमा में कब्जा नहीं हटाने पर नगर निगम या प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण को जेसीबी से तोड़ा जा सकता है और मलबा हटवाया जा सकता है।
दंड/जेल: जानबूझकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उस पर कब्जा करने के लिए संबंधित के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती हैहैं।
निस्तारी तालाब की सुरक्षा हेतु नियम: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, तालाब या जल निकायों को पाटा नहीं जा सकता, चाहे वह निजी जमीन के भीतर ही क्यों न हों।निस्तारी तालाब का उपयोग केवल गांव के निवासियों द्वारा निस्तारी (नहाना, मवेशी धोना, पानी लेना) के लिए ही किया जा सकता है।3. क्या करें यदि तालाब को पाटा जा रहा है?
कलेक्टर/एसडीएम को शिकायत: आप अपने जिले के कलेक्टर, एसडीएम (SDM), या तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL): यदि स्थानीय प्रशासन कार्यवाही नहीं करता है, तो नागरिक मिलकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।
निस्तारी तालाब (निस्तार यानी दैनिक उपयोग के लिए सार्वजनिक जल स्रोत) को बेचना या उसे पाटना (फिल करना) एक गंभीर अपराध है। चूँकि निस्तारी तालाब सरकारी या सामुदायिक भूमि होती है, इसलिए इसे बेचने या पाटने के मामले में कानून जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन यदि दलित या किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जा या नुकसान किया जाता है, तो निम्नलिखित कानूनी कार्यवाही हो सकती है:
. मुख्य कानूनी धाराएं (Criminal and Revenue Actions)छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (CGLRC), 1959 की धारा 248: अवैध रूप से सरकारी भूमि (तालाब सहित) पर कब्जा करने या उसे नुकसान पहुँचाने पर इस धारा के तहत बेदखली, जुर्माना और 6 महीने तक की जेल हो सकती है।
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) / भारतीय न्याय संहिता (BNS):
धारा 420 (धोखाधड़ी): यदि तालाब की जमीन को निजी बताकर बेचा जाता है।धारा 447 (आपराधिक अतिचार): तालाब की जमीन पर अवैध रूप से घुसने या कब्जा करने पर।
धारा 430/431 (सिंचाई/जल स्रोत को नुकसान): सार्वजनिक उपयोग के पानी के स्रोत को नुकसान पहुँचाने पर।
कार्यवाही का स्वरूपतालाब की बहाली: यदि तालाब पाटा गया है, तो प्रशासन उसे खाली करवाकर पुराना स्वरूप लौटाएगा।
संपत्ति की कुर्की: यदि जमीन बेची गई है, तो रजिस्ट्री अवैध मानी जाएगी और क्रेता-विक्रेता दोनों पर कार्यवाही होगी।
छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री तथा राजस्व मंत्री उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए बागबाहरा तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करें तथा भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर प्रकरण दर्ज करते हुए कानूनी कार्यवाही किया जाना आवश्यक हो गया है ताकि किसी का हिम्मत ही ना हो सके की तालाब, डबरी को पाट सकें बेंच सकें।

