मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में खानापूर्ति तबादला, बाबु से लेकर डेलिवेज कम्प्यूटर आपरेटर, कार्यालय सहायक का है बल्ले ACB से जांच कराने पर निकलेगा करोड़ो का सम्पत्ति
रायपुर / छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल इन दिनों चर्चा में है, कुछ दिन पूर्व जारी कार्य आबंटन और तबादला आदेश के बाद विभागीय व्यवस्था को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दिखावटी तबादला आदेश जारी कर कई कर्मचारियों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक बदलाव किया गया तो गया है लेकिन वर्षों से मलाईदार पदों पर जमे कुछ प्रभावशाली बाबुओं को अब भी नहीं हटाया गया है। इनके सांथ सांथ जनकपुर, बिहारपुर, केलहारी जैसे परिक्षेत्रों एवं उप वन मंडल कार्यालय में डेलिवेज कार्यालय सहायक, कम्प्युटर आपरेटर भी लंबे समय में काबिज रहकर लाखों करोड़ो रूपया के मालिक बन चुके हैं। इन डेलिवेजों के पास बड़े बड़े ट्रक जेसीबी, मोटर कार तथा आलिसान बंगला मकान भी है, बहुत ही शातिर व चालाक है, जो रेंजरों को अपने मुट्ठी में रखे हुए हैं।
डेलिवेज का जब इतना बल्ले बल्ले है मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तो बाबु लोगों का पुछिये हि मत!
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि जिन शाखाओं में वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अधिक हैं वहां लंबे समय से वही कर्मचारी काबिज हैं, जो हटने का नाम नही ले रहा है, हैरानी की बात यह है कि तबादला सूची में छोटे कर्मचारियों के नाम तो शामिल किए गये लेकिन उन बाबुओं का नाम सामिल ही नही है उनको तो छुआ तक भी नहीं है जिनके बारे में लंबे समय से विभाग में पकड़ मजबूत होने की बातें कही जाती रही हैं वह मामला ही कुछ और है।
सूत्रों का कहना है कि कुछ चुनिंदा बाबु लोगों को केवल औपचारिक रूप से सीट बदलकर कार्यवाही आईना दिखाने का प्रयास किया गया है, जबकि असली प्रभाव वाले पद अब भी पुराने चेहरों के पास ही बने हुए हैं उन खुर्शी में जमें हुए हैं।
विभाग के अंदर यह भी चर्चा है कि वर्षों से एक ही शाखा में जमे कर्मचारियों की पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि बिना उनकी सहमति के कोई फाइले आगे ही,नही जाता है।
कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठ चुकी है। इसके बावजूद बड़े स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही सामने नहीं आने से सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। अब आम लोगों के बीच चर्चा इस बात की है कि क्या वन विभाग में तबादला केवल दिखावा बनकर रह गया है या फिर वास्तव में विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये कभी निष्पक्ष कार्यवाही भी होगी।

जनकपुर, बिहारपुर, केलिहारी, जैसे रेंज कार्यालय तथा उप वन मंडल कार्यालय में बैठे डेलिवेज कार्यालय सहायक, कम्प्युटर आपरेटर की संपत्ती की अगर ACB से जांच कराया जाये तो करोड़ो रूपया का भ्रष्टाचार के खजाना घर से निकलेगा,
जल्द ही ACB में शिकायत दर्ज कराया जायेगा।

