52वां शक्ति पिठों में से दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी माता है, बस्तर दशहरा हुआ प्रारंभ, मां दंतेश्वरी में पाठ जात्रा शुरू भव्य आयोजन
रायपुर / बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण में कल बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के पावन अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आगाज होने जा रहा है। इस दौरान पारंपरिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार बनाने की श्ठुरलू खोटलाश् रस्म अदा करेंगे। बस्तर दशहरा समिति ने सभी सेवादारों, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों को इस पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया है।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर को देश के प्रमुख शक्ति पीठों में गिना जाता है। हालाँकि पारंपरिक ‘देवी पुराण’ के मूल 51 शक्ति पीठों में इसका सीधा उल्लेख नहीं मिलता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार इसे 52वां शक्ति पीठ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता और स्थानमान्यता: पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ माता सती का ‘दांत’ (दन्त) गिरा था, जिसके कारण इस जगह का नाम ‘दंतेवाड़ा’ और देवी का नाम ‘दंतेश्वरी’ पड़ा।
संगम: यह ऐतिहासिक मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम के पास स्थित है।इतिहास: इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में चालुक्य वंश के राजाओं द्वारा कराया गया था और यह बस्तर के राजाओं की कुलदेवी भी हैं।


