छ.ग.राज्य वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल में स्थानांतरण नीति को चुनौती देकर बैठी हुई है उप मंडल प्रबंधक, अपने कार्य क्षेत्र व मुख्यालय से रहती है हमेशा नादारत ,अनुशासनहिनता का प्रतिक है।
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड बारनवापारा परियोजना मंडल अब वास्तव में एक लिमिटेड ही बनकर रह गया है जो शासन प्रशासन के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रही है शासन का नीति है कि 03 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारी को स्थानान्तरण किया जाना है।
दरअसल मामला यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल जो वन विकास निगम की रीड की हड्डी है जहां भारी तादात में बेसकिमती ईमारती से राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे चिन्हित परियोजना मंडल में उप मंडल प्रबंधक अपने कार्य क्षेत्र और मुख्यालय से गायब रहकर दिन रात एसी की आनंद लेते हुए रायपुर राजधानी में पड़ी रहती है, ऐसे में भला वन विकास निगम का कैसे विकास हो सकता है,छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा बनाए गये स्थानान्तरण नीति को एकाएक ठेंगा दिखाने वाली बात है!
लंबे समय पदस्थ रहने तथा अपनी खुर्शी नही छोड़ने का मुख्य कारण है अपराध को बढ़ावा देना, अपराध करने वाले आंख मूंदकर अपराध कर रहे है, चाहे अतिक्रमण की मामला हो, चाहे अवैध मुरूम खुदाई का मामला हो, चाहे अवैध पत्थर बोल्डर तोड़ाई का मामला हो या काष्टागार जैसे डिपो में अमानक काष्ट की आमद निर्वर्तन की मामला हो, अपराध तो अपराध ही होता है ।
बारनवापारा परियोजना मंडल में कुछ अजिबों गरिब अधिकारी और कर्मचारी देखने को मिला
कोडार काष्ठागार डिपो बनने से पहले यह डिपो ग्राम बिरकोनी में संचालित हो रहा था, बाद में कोडार में काष्ठागाार डिपो बनाया गया, जब से डिपो बना है तब से रेंजर व प्रभारी रेंजर रहे बाकी लिपकीय कार्य केवल दैनिक वेतनभोगी के द्वारा ही किया जाता रहा है।
आमद निर्वतन की जानकारी मासिक जानकारी पाक्षिक जानकारी गोश्वारा मिलान किनके द्वारा किया जाता था किसी से छुपा नही है सब जानते है।
काष्ठागार डिपों में 2431 नग सागौन की लट्ठा की अवैध आमद से मचा खलबली, सब बंचने की जुगाड़ में लगे है
कोडार काष्ठागार डिपो में वर्ष 2021 की स्थिति में इतना गंभीर विषय सामने आया है, न जाने इसके पहले और क्या होता रहा होगा, जो अधिकारी, कर्मचारी 2431 नग 436.459 घन मीटर सागौन लट्ठा की जंगल से अवैध परिवहन कराया है, डिपो में अवैध आमद लिये, फिर उस लट्ठा को निलाम में किसने रखवाया है , इसके बाद निलामी भी करा दिये और परिवहन भी हो गया काष्ठागार डिपो से!
जब 2431 नग सागौन का लट्ठा 436.459 घन मीटर बेस किमती लट्ठा की बिक्री हुआ तो क्या वह पैसा शासन मतलब वन विकास निगम के खाते में गया या फिर कहीं और गया है? यह बहुत गंभीर मामला है! शिकायत हुआ तो ये से अधिकारी कर्मचारी को जांचकर्ता अधिकारी बनाया जाता है जो मामला को स्वयं कफन दफन करने के लिए तुले हुए हैं।
गंभीर जांच का विषय ये है की काष्ठागार डिपो में आमद लेना, व्हाऊचर बनाना, रिपोर्टिंग करना, अपसेट प्राईज बनाना, जाब प्रमाणक बनाकर पेंमेट कराना, टिम्बर एकाऊंट, समाधान पत्रक बनाने का कार्य कौन करता था? दिनांक 31.12.1998 से वर्ष 2009तक बिरकोनी डिपो तथा 2009 से वर्ष 2021 तक कोडार डिपो किसका हस्तलिपी है? स्थापना व्यय के कार्य भी किनके द्वारा कराया गया है? और सभी कार्यों में किनके राईटिंग और हस्तलिखित है? जब विधिवत जांच कराया जायेगा तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। क्या वन विकास निगम के अधिकारी येसे हेराफेरी करने वाले के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करायेगा !
उक्त मामले में वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल के जितने भी अधिकारी, कर्मचारी है सभी ने चुप्पी साध लिया है कहीं गले का फांस न बन जाये!



जिस डिपो के डिपो प्रभारी एवं उप मंडल प्रबंधक दोषी नजर आ रहा है येसा प्रतित होता है उसी को जांचकर्ता अधिकारी बना दिये गये हैं। अब स्वयं अपने गले में फांस थोड़ी न लगायेगा, इसलिये स्वयं के सांथ सांथ भ्रष्टाचार को अंजाम देने वाले सरगना को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कोडार काष्ठागार की यह खेल अब बारनवापारा परियोजना मंडल को डुबाकर रहेगी, 2431 नग सागौन लट्ठा जो 436.459 घन मीटर होता है यह हेरा फेरी का मामला अब शांत नही होगा, वर्ष 1998 से वर्ष 2021 तक बिरकोनी डिपो से लेकर कोडार काष्ठागार डिपो में किनका हस्तलिखित है राईटिंग इसकी जांच कराई जाये अगर वन विकास निगम के अधिकारी अक्षम है तो लिखित में हमें अनुमती दें हम आगरा से इस हस्तलिखित राइटिंग की जांच करायेंगे!
प्रबंध संचालक की चुप्पी समझ से परे है , उक्त मामला को गंभीरता से लेते हुए राईटिंग की जांच कराने के लिए आगरा भेजा जाये ताकी भ्रष्टाचार की पोल परत दर परत खुल सके। सागौन को बेंच खाना और इतने बेस किमती सागौन लकड़ी को पचा पाना सबकी बस की बात नही है, जो झुठ बोलने का डिग्री हासिल किया होगा जो हर शब्दो में लाजवाब झुठ परोसता होगा वही व्यक्ति इतने बड़े कारनामे को अंजाम दे सकता है।

वर्तमान में पदस्थ उप मंडल प्रबंधक का लगातार बारनवापारा परियोजना मंडल में चिपककर रहना संदेह को जन्म देता है! कहीं काष्ठागार का स्वाद खुर्शी छोड़ने नही दे रहा होगा, जिसके कारण कुंडली मारकर स्थानान्तरण नीतियों को चुनौती देकर बैठी हुई है।
जबकी उप वन मंडल प्रबंधक श्रीमति चित्रा त्रिपाठी का मुख्यालय महासमुंद है किन्तु महासमुंद में रहती नही है,और मंडल कार्यालय में ही अपना कार्यालय बना लिये है, जब जिम्मेदार अधिकारी ही अपने कर्तब्यों का निर्वहन सूचारू रूप से नही करेंगें तो निचले स्तर के कर्मचारियों का छोड़ ही दिजीये, नांच न जाने आंगन टेढ़ा!
अगर अपने मुख्यालय में रहकर कार्य क्षेत्र का निसदिन भ्रमण करती तो,अवैध कटाई, अवैध मुरूम परिवहन, अवैध, मिट्टी परिवहन, कोडार काष्ठागार डिपो जैसे सेंसेटिव जगहों में अवैध ईमारतीसकाष्ट की आमद, काष्ठ परिवहन जैसे कार्य नही हो पाता सभी शिकंजा में रहता लेकिन उनके अनुपस्थिति को ही सुलभ अवसर भुनाते हुए करोड़ो रूपया का चुना लगा दिया गया है जिसमें उस समय रहे उप मंडल प्रबंधक भी दोषी है!
क्या ईमानदारी का चोला ओढ़कर 2431 नग सागौन का लट्ठा 436.459 घन मीटर की बेस कीमती लकड़ी के मामला को सुलझा पायेगा या नही…!


