छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय मोदीजी को टक्कर दे रहे है, मुख्यमंत्री साय ने 2.5 साल में विज्ञापनों पर फूँके 1095 करोड़ रुपये!
रायपुर / छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय की सरकार ने 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार पर ढिंढ़ोरा पिटते हुए 1,095 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं। विधानसभा में सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार यह खर्च औसतन 1.33 करोड़ रुपये प्रतिदिन होता है।
छत्तीसगढ़ से संचालित वेबसाइट संचार क्रांति न्यूज एवं संचार भारत न्यूज के अनुसार, यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक सावित्री मनोज मंडावी के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी है। राज्य में जनसंपर्क विभाग का प्रभार भी मुख्यमंत्री साय जी के पास ही है।
सबसे ज्यादा खर्च इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न माध्यमों पर विज्ञापन और प्रचार-प्रसार के लिए किया गया व्यय इस प्रकार है:-
1. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया:- 344 करोड़ 4 लाख 57 हजार 623 रुपये
2. प्रिंट मीडिया:- 198 करोड़ 26 लाख 30 हजार 840 रुपये
3. डिजिटल मीडिया:- 55 करोड़ 81 लाख 91 हजार 658 रुपये
4. सोशल मीडिया:- 5 करोड़ 78 लाख 45 हजार 391 रुपये
5. प्रकाशन माध्यम:- 19 करोड़ 17 लाख 85 हजार 671 रुपये
6. क्षेत्र प्रचार (Field Publicity):- 414 करोड़ 1 लाख 4 हजार 531 रुपये
7. आदिवासी उपयोजना के तहत प्रचार:- 22 करोड़ 17 लाख 79 हजार 242 रुपये
8. विशेष अवसरों पर प्रचार-प्रसार:- 35 करोड़ 92 लाख 41 हजार 742 रुपये
हालांकि, इन आंकड़ों में छत्तीसगढ़ संवाद या अन्य विभागों द्वारा सीधे जारी किए गए विज्ञापनों पर हुआ खर्च शामिल नहीं है। ऐसे आंकड़े फिलहाल उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
केंद्र सरकार के विज्ञापन खर्च से तुलना
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य सरकार के विज्ञापन खर्च की तुलना केंद्र सरकार के प्रचार-प्रसार पर हुए खर्च से भी की जा रही है।
हाल ही में लोकसभा में समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहित अन्य सांसदों के प्रश्न के लिखित उत्तर में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने बताया था कि 2014-15 से 2024-25 के बीच केंद्र सरकार ने विज्ञापनों पर 5,987.46 करोड़ रुपये खर्च किए। यह राशि औसतन लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रतिदिन बैठती है।
इस आधार पर देखा जाए तो छत्तीसगढ़ सरकार का औसत दैनिक विज्ञापन खर्च भी करीब 1.33 करोड़ रुपये है, जो केंद्र सरकार के औसत दैनिक विज्ञापन व्यय के करीब पहुंचता है।
पहले की तुलना में खर्च में बड़ा इजाफा
छत्तीसगढ़ में सरकारी प्रचार-प्रसार पर खर्च लगातार बढ़ता रहा है। इससे पहले विधानसभा में तत्कालीन भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक के प्रश्न के जवाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया था कि उनकी सरकार ने 1 जनवरी 2020 से 31 जनवरी 2021 के बीच प्रचार-प्रसार पर 172 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च किए थे। उस अवधि में औसत खर्च लगभग 44 लाख रुपये प्रतिदिन था।
नए आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान सरकार का औसत दैनिक विज्ञापन व्यय उस अवधि की तुलना में काफी अधिक है।
सरकार छत्तीसगढ़ के अनियमित, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण करने के लिये कर रहे है बजट का बहाना
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और वित्त विभाग की कमान पूर्व कलेक्टर ओ.पी चौधरी के हांथ में थम्हाया गया है, वित्त मंत्री की खुर्शी पर बैठते ही स्वर बदल गये हैं। जिनके निगरानी में अनावश्यक वाहवाही बटोरने के लिये जिस प्रकार से मिडिया व न्यूज के लिय खर्च किये गये है उतना पैसों के कुछ हिस्सों के बजट में छत्तीसगढ़ के सारे अनियमित,दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी,संविदा कर्मचारी का नियमितीकरण हो जाता!
लेकिन छत्तीसगढ़ की सरकार नही चाहती है कि अनियमित,दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण हो, जब नियमितीकरण की बात होती है तो वित्त मंत्री मुह बना लेते है कि अभी हमारे पास बजट नही है।
अरे भाई इतने पैसे कहां से आ गये जो पुरा के पुरा बजट मिडिया प्रेस में लुटा दिये गये हैं, क्या यह पैसा छत्तीसगढ़ के बेरोजगार, अधमरा जैसे बीच मजधार फंसे हुए अल्पवेतन पाने वाले अनियमित,दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए व्यय किये होते तो उनका जीवन संवर जाता लेकिन सरकार बिल्कुल भी नही चाहता है कि इन सबका नियमितीकरण हो!
भले ही पानी की तरह पैसा क्यों न बह जाये मिडिया व प्रेस में, सरकार सबका ख्याल रखे तभी आने वाला समय में पुन: सरकार बनाने की चाहत रखे नही तो भुल जाये!

